नई दिल्ली. केंद्र सरकार सोमवार को ‘आर्थिक रूप से पिछड़े’ सवर्णों को नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने के लिए विधेयक लाई. अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो लगभग देश की पूरी जनसंख्या किसी न किसी आरक्षण या कोटा की जद में आ जाएगी.

8 लाख तक की वार्षिक आमदनी वाले लोगों को देखें. आईटी डिपार्टमेंट के डेटा और एनएसएसओ की रिपोर्ट बताती है कि 95% भारतीय परिवार इस लिमिट के अंतर्गत आते हैं. 8 लाख रुपये सलाना आय का मतलब होगा कि 5 लोग के परिवार में प्रति व्यक्ति आय 13 हजार रुपये से थोड़ी ज्यादा हो. साल 2011-2012 में एनएसएसओ के सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में 2625 रुपये प्रति व्यक्ति आय और शहरी क्षेत्रों में 6015 रुपये प्रति व्यक्ति आय है. ऐसे में दोनों ही इसके अंतर्गत आएंगे. हालांकि, 5% से ज्यादा आबादी इसके बाहर आती हैं.

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साल 2016-17 की बात करें तो 23 मिलियन लोगों ने अपनी आय 4 लाख से ज्यादा बताई है. अगर एक परिवार में इस तरह के दो शख्स को देखा जाए तो 1 करोड़ परिवार 8 लाख के कट-ऑफ में आते हैं. ऐसे में ऐसे परिवार जो 8 लाख रुपये कमाते हैं राष्ट्रीय औसत से ज्यादा हैं, उन्हें गरीब नहीं माना जाता है.

अब जमीन की क्राइटेरिया को देखें
जमीन रखने वाली क्राइटेरिया थोड़ी उदार है. साल 2015-16 के कृषि सूचकांक के मुताबिक, 86.2% कुल जमीन 2 हेक्टेयर या 5 हेक्टेयर की साइज के अंदर है. ऐसे में देखें ता ज्यादातर भारतीय इस क्राइटेरिया को फॉलो कर लेंगे.

1000 स्क्वायर फीट के अंदर घर
तीसरा क्राइटेरिया 1000 वर्ग फीट के अंदर घर होने का है. एनएसएसओ ने साल 2012 में हाउसिंग कंडिशन पर एक रिपोर्ट जारी की. इसके मुताबिक अमीर 20% आबादी के पास औसत घर 45.09% स्कवायर मीटर होता है. यह 500 स्क्वायर फीट होता है. यह क्राइटेरिया का लगभग आधा है. इसे देखें तो औसत का 80% या फिर 90% भी इस क्राइटेरिया के अंतर्गत आता है.

ये भी है सीन
ऐसे में देखें तो नया कोटा हर उस तबके लिए हो सकता है, जो एससी/एसटी या ओबीसी रिजर्वेशन के अंतर्गत नहीं आता है. माना जाता है कि एससी/एसटी लगभग 23 फीसदी और ओबीसी 40-50 फीसदी है, हालांकि इसका कोई आधिकारिक डेटा नहीं है. ऐसे में देखा जाए तो अभी 27-37% आबादी कोटा के अंतर्गत नहीं आती है. लेकिन माना जा रहा है कि 10% वाले इस क्राइटेरिया से लगभग पूरी आबादी कोटा के दायरे में आ जाएगी.