कोहिमा: भाजपा नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को कुछ स्थानीय संगठनों के विरोध के बाद दोयांग की बजाय धनसिरी नदी में विसर्जित किया. हालांकि ईसाई बहुल नगालैंड में कुछ स्थानीय संगठनों ने यह कहते हुए नदी में अस्थियों को प्रवाहित करने का विरोध किया कि यह प्रथा नगा संस्कृति एवं परंपरा के खिलाफ है. Also Read - 3000 मी. की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी सुरंग का नाम पूर्व पीएम के नाम पर होगा

Also Read - Madhya Pradesh Election Results 2018: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा 502 वोट से पीछे

भाजपा नेताओं ने आज बताया कि पार्टी ने पहले राज्य की सबसे बड़ी दोयांग नदी में अस्थियों को प्रवाहित करने की योजना बनायी थी, जो वोखा जिले से गुजरती है. उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों को विरोध के बाद अस्थि कलश को दीमापुर के धनसिरी नदी में प्रवाहित किया गया. Also Read - छत्‍तीसगढ़: सीएम रमन सिंह के गढ़ में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर टिकट मांग रही हैं भाजपा और कांग्रेस

वाजपेयी ने 2004 के चुनाव नतीजे से पहले ही कहा था, ‘सरकार तो गई, हम हार रहे हैं’

वोखा जिले के शीर्ष जनजातीय निकाय लाथोआ होहो और लोथा बापटिस चर्चेज एसोसिएशन ने अस्थियों को दोयांग नदी में विसर्जित किये जाने का विरोध करते हुए इसे नगा संस्कृति और परंपरा के विरूद्ध बताया था. विपक्षी नगा पीपुल्स फ्रंट ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की अस्थियों को प्रवाहित करने ले लिए राज्य में लाकर लोगों की भावनाओं को ‘आहत’ किया है.

मनमोहन ने पीएम मोदी को दी ‘अटल नसीहत’, ‘नेहरू मेमोरियल से न करें छेड़छाड़’

एनपीएफ प्रवक्ता अचुमबेमो किकोन ने संवाददाताओं से कहा कि वाजपेयी एक प्रख्यात नेता थे और सभी पार्टियों के लिए वे सम्मानीय थे लेकिन भाजपा को राजनीति को धार्मिक परंपराओं से नहीं जोड़ना चाहिए था. बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लंबी बीमारी के बाद 16 अगस्‍त को मौत हो गई थी. भाजपा ने उनकी अस्थियों को देश की सभी प्रमुख नदियों में विसर्जित करने का अभियान शुरू किया है.