नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए इस पद पर नियुक्त किया है और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है. कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में इसकी जानकारी दी गई है. आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने डोभाल को इस पद पर दोबारा पांच साल के लिए नियुक्त किए जाने को अपनी मंजूरी दे दी है. उनकी नियुक्ति 31 मई 2019 से प्रभावी होगी और प्रधानमंत्री के कार्यकाल के साथ साथ उनकी नियुक्ति भी समाप्त हो जाएगी.

आदेश में कहा गया है, ”इस पद पर नियुक्ति के दौरान उन्हें कैबिनेट मंत्री का रैंक दिया गया है.” डोभाल को पहली बार मई 2014 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था.

डोभाल पहले ऐसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं जिन्हें दूसरा कार्यकाल दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि उनके पिछले पांच साल के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए डोभाल को व्यापक रूप से सराहना मिली. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक तथा बालाकोट हवाई हमले के दौरान अहम भूमिका निभाई थी.

भारत, चीन और भूटान के ट्राईजंक्शन में स्थित डोकलाम में भारत और चीन के बीच 73 दिनों तक चले गतिरोध के दौरान उनकी भूमिका को लेकर भी डोभाल ने प्रशंसा बटोरी. जनवरी 2005 में डोभाल ने गुप्तचर ब्यूरो के प्रमुख के पद से अवकाश ग्रहण किया था. डोभाल ने 33 साल से अधिक समय तक तक खुफिया अधिकारी के रूप में काम किया.

अजीत डोभाल 1968 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के रिटायर्ड अफसर हैं और खुफिया सर्किल में उन्हें सबसे कुशल अधिकारियों में से एक माना जाता है. इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी 814 का 1999 में अपहरण कर अफगानिस्तान में कंधार ले जाया गया था . डोभाल उन अपहर्ताओं के साथ हुई बातचीत में मुख्य वार्ताकार थे.

सूत्रों के मुताबिक, डोभाल और नवनियुक्त विदेश मंत्री एस.जयशंकर कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चो पर मोदी सरकार के दो महत्वपूर्ण चेहरे होंगे. दोनों के पास दक्षिण पूर्वी और दक्षिण एशियाई रणनीतिक मामलों में व्यापक अनुभव है. डोभाल और जयशंकर ने इससे पहले ओबामा प्रशासन और मोदी नीत सरकार के बीच करीबी बढ़ाने का काम किया था.

74 साल के डोभाल पहले ऐसे एनएसए हैं, जिन्हें लगातार दूसरा कार्यकाल दिया गया है. पहली बार मई 2014 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था और चीनी पक्ष की तरफ से मंत्रिस्तरीय वार्ता के लिए जोर देने के बाद उन्हें उसी साल सितंबर में राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था. ‘कीर्ति चक्र’ जैसा सैन्य सम्मान पाने वाले पहले पुलिस अधिकारी डोभाल देश के भीतर और बाहर के खतरों से निपटने में अनुभव से मदद देंगे.

डोभाल ने 33 साल से अधिक समय तक गुप्तचर अधिकारी के तौर पर काम किया और इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर, जम्मू कश्मीर और पंजाब में अपनी सेवाएं दी. उन्होंने ब्रिटेन में भी अपनी सेवाएं दी हैं. जनवरी 2005 में गुप्तचर ब्यूरो के प्रमुख पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद डोभाल ने दिल्ली में एक गैर सरकारी संगठन विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की शुरूआत की थी.  (इनपुट: एजेंसी)