नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के 199 पुलिस स्टेशन क्षेत्रों में से केवल 10 पुलिस स्टेशन क्षेत्र में पाबंदी जारी है और यहां पाबंदी में ढील पूरी तरह पाकिस्तान के व्यवहार पर निर्भर है. सुरक्षा एवं खुफिया मुद्दों पर निगरानी रखने के लिए बीते दो सप्ताह से राज्य में मौजूद एनएसए ने कहा कि सरकार ने सीमा से केवल 20 किलोमीटर के अंदर संचार टॉवरों से सिग्नल की पहचान की है.

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि सभी पाबंदियां समाप्त हो जाए, लेकिन यह निर्भर करेगा कि पाकिस्तान कैसा व्यवहार करता है. यह उत्तेजक और प्रतिक्रियावादी स्थिति है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान अच्छा बर्ताव करने लगे, आतंकवादी घुसपैठ नहीं करे और अगर अपने ऑपरेट्विस को अपने टॉवर के जरिए सिग्नल न भेजे तो हम पाबंदी हटा सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के 92.5 प्रतिशत भाग से पाबंदी हटा दी गई है. डोभाल ने कहा कि आतंकवादी अपने हैंडलर्स से हथियारों और अन्य लॉजिस्ट्क्सि के लिए कूट शब्दों(कोर्ड वर्ड्स) का प्रयोग करते हैं. एक प्राप्त सूचना के अनुसार वे कह रहे हैं कि ‘कितने सेब के ट्रक आ-जा रहे हैं, क्या तुम उसे रोक नहीं सकते? क्या हम तुम्हारे लिए चूड़िया भेंजे.

आतंकवादियों ने एक दुकान खोलने के कारण एक व्यापारी के घर को तोड़ा
सोपोर में आतंकवादियों ने एक दुकान खोलने के कारण एक व्यापारी के घर को तोड़ दिया और उसके परिवार पर हमला कर दिया, जिसमें एक दो वर्षीय बच्ची समेत चार लोग घायल हो गए. एनएसए ने प्रशासन को बच्ची के इलाज के लिए उसे नई दिल्ली स्थित एम्स भेजने के लिए कहा है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार आतंकवादी लोगों के मन में भय पैदा करने के लिए इस तरह के हमले कर रहे हैं. डोभाल ने कहा कि हम पाकिस्तानी आतंकवादी से कश्मीरियों की जिंदगी को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, भले ही हमें प्रतिबंध लगाना पड़े. आतंक ही एकमात्र हथियार है जिसका प्रयोग पाकिस्तान यहां अस्थिरता पैदा करने के लिए कर रहा है.

230 पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान
लगभग 230 पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान की गई है, जबकि इनमें से कई ने घुसपैठ की है और कुछ को गिरफ्तार किया गया है. कश्मीर घाटी के कुछ भाग में इंटरनेट और फोन लाइंस अभी भी प्रभावित है जबकि जम्मू क्षेत्र और लद्दाख में संचार लाइन खोल दिए गए हैं. डोभाल ने यह भी कहा कि सेना द्वारा अत्याचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि राज्य में पुलिस व अर्धसैनिक बल ही केवल जन संबंधी व्यवस्था से निपटने के लिए जिम्मेदार होती है. डोभाल ने कहा कि सेना का काम केवल आतंकवादियों से लड़ने का है. मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि अधिकतर कश्मीरी अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का समर्थन करते हैं. वे वृहत अवसर, भविष्य, आर्थिक प्रगति और रोजगार की ओर देखते हैं. केवल कुछ असामाजिक तत्व की इसका विरोध करते हैं.