बालासोर (ओड़िशा): भारत ने रविवार को ओड़िशा के एक परीक्षण केंद्र से सतह से हवा में मार करने वाली अपनी अत्याधुनिक त्वरित प्रतिक्रिया मिसाइलों (क्यूआरएसएएम) का सफल परीक्षण किया. जिन दो ऐसी मिसाइलों का परीक्षण किया गया वे लक्ष्यों को भेदने में सफल रहीं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बालासोर के समीप चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण केंद्र से दो ऐसी मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है, जो किसी भी मौसम में मार करने में सक्षम हैं और ये रडार की पकड़ में नहीं आएगी.

आधिकारिक बयान के मताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अहम उपलब्धि पर डीआरडीओ को बधाई दी है. बता दें कि इन्‍हें सेना की खास जरूरतों के मद्देनजर रखते हुए तैयार किया गया है.

ये हैं खासियतें
– भारतीय सेना के लिए सभी मौसमों और सभी भौगोलिक क्षेत्रों के अनुकूल इस क्यूआरएसएएम को विकसित किया है
– यह मिसाइल कुछ ही समय में लक्ष्य का पता लगाकर उसे भेद देने में सक्षम है
– इस मिसाइल में इलेक्ट्रोनिक निरोधक तंत्र लगे हैं, जिससे इसे रडार द्वारा जाम नहीं किया जा सकता है
– इस मिसाइल को एक ट्रक के ऊपर लगाया जा सकता है और यह एक कनस्तर में समा सकती है
– यह 25-30 किलोमीटर तक मार कर सकती है

पहले हो चुके हैं दो परीक्षण
सूत्रों के अनुसार, इस मिसाइल का पहला परीक्षण 4 जून, 2017 को किया गया था. 26 फरवरी, 2019 को भी इसका सफल परीक्षण किया गया था.

दो मिसाइलों ने दो लक्ष्यों को भेदा
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ”परीक्षण के दौरान इन दो मिसाइलों ने दो लक्ष्यों को भेदा और अपने मिशन को पूरा करने में वे सफल रहीं. कई अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों से लैस इन क्यूआरएसएएम ने विभिन्न दूरियों और ऊंचाइयों पर लक्ष्यों को भेदा.
इस पूरे मिशन को विभिन्न इलेक्ट्रो ऑप्टिकल निगरानी प्रणाली, रडार प्रणाली और टेलीमैट्री प्रणाली में कैद किया गया.