Kisan Andolan: गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली करने के बाद किसानों की अगली योजना संसद की ओर पैदल मार्च करने की है. ये जानकारी क्रांतिकारी किसान युनियन के नेता दर्शन पाल ने सोमवार को दी. उन्होंने कहा कि विभिन्न जगहों से किसान 1 फरवरी को संसद की ओर पैदल मार्च करेंगे.Also Read - दिल्‍ली में फिलहाल नहीं खुलेंगे स्‍कूल और कॉलेज, ऑनलाइन जारी रहेंगी कक्षाएं

किसान नेता दर्शन पाल ने कहा, “किसान, बजट पेश किए जाने के दिन एक फरवरी को विभिन्न स्थानों से संसद की ओर कूच करेंगे.” क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता ने कहा कि ट्रैक्टर परेड के बाद ये उनका अगला कार्यक्रम होगा क्योंकि सरकार हमारी मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं है. Also Read - Delhi में कोव‍िड प्रत‍िबंधों में छूट, मॉल, सिनेमा, रेस्‍टोरेंट्स 50 फीसदी की क्षमता से संचाल‍ित होंगे

उन्होंने कहा, “इतने दौर की वार्ता के बाद अब तक तीनों कृषि कानून रद्द नहीं किए गए हैं. 60 दिनों से किसान इतनी ठंडक में इन कानूनों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर धरना देकर प्रदर्शन कर रहे हैं अब अगला कार्यक्रम संसद की ओर मार्च किए जाने का ही बनाया गया है. कानून वहां से पास किया गया था तो हम अब वहां तक पैदल मार्च करके विरोध करेंगे.” Also Read - Budget Session of Parliament: सोनिया गांधी के नेतृत्व में कल कांग्रेस संसदीय समूह की बैठक, बजट सत्र के लिए बनेगी रणनीति

बता दें कि दर्शन पाल का ये बयान ऐसे समय में आया है जब किसान 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड निकालने जा रहे हैं. गौरतलब है कि केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले दो महीने से प्रदर्शन कर रहे किसानों की सरकार के साथ 11 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन बात नहीं बनी है.

बता दें कि इससे पहले दिन में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक निलंबित रखने का सरकार का प्रस्ताव एक ‘‘सर्वश्रेष्ठ पेशकश’’ है और उन्हें उम्मीद है कि प्रदर्शनकरी किसान संगठन इसपर पुनर्विचार करेंगे तथा अपने फैसले से अवगत कराएंगे.

सरकार और 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच 11वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही थी. दसवें दौर की वार्ता में सरकार ने नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक निलंबित रखने की पेशकश की थी, लेकिन किसान यूनियनों ने इसे खारिज कर दिया था. सरकार ने यूनियनों से 11वें दौर की वार्ता में प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और अपने निर्णय से अवगत को कहा था.