नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने के प्रस्‍ताव का समर्थन करने के बाद विधि आयोग राजनीतिक दलों और अन्‍य संबंधित पक्षों के साथ इस पर विचार कर रहा है, लेकिन इस बीच कई पार्टियों ने इसका विरोध कर अपने इरादे स्‍पष्‍ट कर दिए हैं. इनमें भाजपा की सहयोगी और विरोधी पार्टियां भी शामिल हैं. गोवा में भाजपा की गठबंधन सरकार में शामिल गोवा फॉर्वर्ड पार्टी इस प्रस्‍ताव के पक्ष में नहीं है. वहीं, पश्चिम बंगाल में सत्‍तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के अलावा पुडुचेरी के मुख्‍यमंत्री वी नारायणसामी ने इसका विरोध किया है. इन पार्टियों और नेताओं ने इस प्रस्‍ताव को अव्‍यावहारिक और संविधान के खिलाफ बताया है. Also Read - 'पीएम मोदी कृषि बिल को ऐतिहासिक बता रहे हैं, वाकई ये है तो किसान ख़ुश क्यों नहीं'

Also Read - Bhiwandi Building Collapses: राष्ट्रपति कोविंद और PM मोदी ने भिवंडी में इमारत गिरने से हुई 10 लोगों की मौत पर दुख जताया

तृणमूल कांग्रेस ने बताया असंवैधानिक Also Read - राज्यसभा में दोनों कृषि विधेयक पास, पीएम मोदी बोले- अन्नदाताओं को आजादी मिली, जारी रहेगी सरकारी खरीद

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का विचार अव्यवहारिक और असंवैधानिक है. बनर्जी ने कहा, “संविधान के बुनियादी ढांचे को बदला नहीं जा सकता. हम एक साथ चुनाव कराने के विचार के खिलाफ हैं, क्योंकि यह संविधान के खिलाफ है. ऐसा नहीं किया जाना चाहिए.”

कांग्रेस अब ‘बेल गाड़ी’, इसके कई नेता और मंत्री इन दिनों जमानत पर हैं : पीएम मोदी

खर्च से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है लोकतंत्र

वह मोदी के एक राष्ट्र एक चुनाव योजना पर विधि आयोग के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक से इतर संवाददाताओं से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा, “मान लीजिए कि 2019 में केंद्र और सभी राज्यों में एक साथ चुनाव होते हैं. अगर केंद्र में एक गठबंधन की सरकार बनती है और वह बहुमत खो देती है तो केंद्र के साथ-साथ सभी राज्यों में फिर से चुनाव कराने होंगे.”बनर्जी ने कहा, “यह अव्यवहारिक, असंभव और संविधान के प्रतिकूल है. लोकतंत्र और सरकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. वित्तीय मुद्दा कम महत्व का है, पहली प्राथमिकता संविधान और लोकतंत्र है. संविधान को बरकरार रखा जाना चाहिए.”

अब साल में दो बार दे सकेंगे NEET-JEE, सरकार ने NTA को सौंपी परीक्षाओं की जिम्मेदारी

संविधान निर्माता नहीं थे पक्ष में

तृणमूल नेता ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि उसके नेता केवल बात करते हैं और कोई काम नहीं करते. साथ ही उन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में भी कोई योगदान नहीं दिया है. उन्होंने कहा, “आंबेडकर समेत संविधान लिखने वाले लोग पंडित थे. हम उनकी तुलना में कुछ भी नहीं जानते. उन्होंने कभी ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के बारे में बात नहीं की. उन्होंने हमें संघीय संरचना दी. केंद्र सरकार राज्यों की तुलना में प्रधान नहीं है.”

भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा- जम्मू कश्मीर में सरकार नहीं बनाएगी बीजेपी

बीजेपी की सहयोगी जीएफपी ने भी किया विरोध

गोवा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली सरकार में शामिल गोवा फॉर्वर्ड पार्टी (जीएफपी) भी नहीं चाहती है कि लोकसभा चुनाव के साथ राज्य विधानसभा के चुनाव भी करवाए जाएं. जीएफपी ने शनिवार को कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ करवाने का प्रस्ताव क्षेत्रीय भावनाओं के खिलाफ है. जीएफपी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने संवाददाताओं से कहा, “प्रस्ताव पूरी तरह अव्यावहारिक है. यह कारगर नहीं होगा.”

आरएसएस की राजनीति मुसलमानों की भाजपा से बढ़ा रही दूरी: शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद नकवी

गोवा के मंत्री ने कहा, क्षेत्रीय मुद्दे कमजोर होंगे

उन्होंने कहा कि अगर प्रस्ताव को अमल मे लाया गया तो क्षेत्रीय मसले ठंडे बस्ते में चले जाएंगे. शहर एवं ग्राम नियोजन और कृषि मंत्री विजय सरदेसाई ने कहा, “सुझाव अच्छा है, लेकिन इससे क्षेत्रीय मुद्दे कमजोर पड़ जाएंगे. अगर एक साथ चुनाव हुए तो हमारे जैसे क्षेत्रीय दल और मसलों की अहमियत कम हो जाएगी. यही कारण है कि हम इसका विरोध कर रहे हैं. यह क्षेत्रीय भावना के खिलाफ है.”

अखिलेश यादव का आरोप, चुनाव देख बदले भाजपा के सुर, किसानों की हितैषी होने का दिखावा कर रही

नारायणसामी ने कहा अव्‍यावहारिक

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने भी शनिवार को कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना व्यावहारिक नहीं है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘एक साथ चुनाव व्यावहारिक नहीं हैं. मैंने विधि आयोग और गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस विषय पर अपने विचारों से अवगत कराया है.’’

करणी सेना का ऐलान दुष्कर्मी का सिर काटने वाले को देंगे 25 लाख का ईनाम

एआईएडीएमके ने किया सशर्त समर्थन

हालांकि, तमिलनाडु में सत्‍तारूढ़ ऑल इंडिया अन्‍ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने इस प्रस्‍ताव का समर्थन किया है. पार्टी के वरिष्‍ठ नेता एम थंबी दुरई ने कहा है कि हम इस प्रस्‍ताव के विरोध में नहीं हैं, लेकिन 2019 में इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए. 2024 के चुनावों के लिए यदि इसे लागू किया जाए तो हम इसका समर्थन करेंगे.

विधि आयोग कर रहा है सलाह-मशविरा

विधि आयोग ने एक साथ चुनाव करवाने के मसले पर शनिवार और रविवार को परामर्श करने के लिए सभी राष्ट्रीय और राज्यों के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को बुलाया है. आयोग ने ‘एक साथ चुनाव : संवैधानिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य’ नामक एक मसौदा तैयार किया है और इसे अंतिम रूप देने और सरकार के पास भेजने से पहले इसपर राजनीतिक दलों, संविधान विशेषज्ञों, नौकरशाहों, शिक्षाविदों और अन्य लोगों सहित सभी हितधारकों से इस पर सुझाव मांगे हैं. विधि आयोग के साथ देश के मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों की दो दिवसीय बैठक यहां आयोजित की जा रही है. इसमें भाग लेने वाले क्षेत्रीय दलों में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, रालोद, शिरोमणि अकाली दल शामिल हैं. चुनाव आयोग ने पहले ही कह दिया है कि वह एक साथ चुनाव करवाने में सक्षम है, बशर्ते कानूनी रूपरेखा और लॉजिस्टिक्स दुरुस्त हो.

 

इनपुट: एजेंसी