नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार की शाम को कहा, किसी एक बात जिसने हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है- वो है राष्ट्रहित से ज्यादा प्राथमिकता अपनी विचारधारा को देना. हमारी विचारधारा राष्ट्रहित के विषयों में, राष्ट्र के साथ नजर आनी चाहिए, राष्ट्र के खिलाफ नहीं. Also Read - किसान आन्दोलन: दिल्ली-नोएडा बॉर्डर से किसानों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण के दौरान कही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ”राष्ट्रहित के मामले में हमारी विचारधारा को राष्ट्र के समर्थन के रूप में देखा जाना चाहिए ना कि देश के विरोध के रूप में.” Also Read - PM Modi: 85 साल की बुजुर्ग पीएम मोदी के नाम करना चाहती हैं अपनी जमीन, जानें क्यों

प्रधानमंत्री ने कहा, ये प्रतिमा देश को युवाओं के नेतृत्व में विकास के उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी, जो स्वामी जी की अपेक्षा रही है. ये प्रतिमा हमें स्वामी जी के सशक्त-समृद्ध भारत के सपने को साकार करने की प्रेरणा देगी. Also Read - पराली जलाना बंद हो गया है, लेकिन दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति अब भी गंभीर: प्रकाश जावड़ेकर

पीएम मोदी ने कहा, ”मेरी कामना है कि JNU में लगी स्वामी जी की ये प्रतिमा, सभी को प्रेरित करे, ऊर्जा से भरे. ये प्रतिमा वो साहस दे, हिम्मत दे जिसे स्वामी विवेकानंद प्रत्येक व्यक्ति में देखना चाहते थे. ये प्रतिमा वो करुणाभाव सिखाए, दया सिखाए जो स्वामी जी के दर्शन के मुख्य आधार रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा, अच्छे सुधारों को खराब राजनीति माना जाता था, लेकिन हमारी नेक प्रतिबद्धता व इरादों के कारण अब इसे अच्छी राजनीति माना जाता है. उन्‍होंने कहा, लोगों ने अपने वोट के माध्यम से देश की उन्नति के लिए हमारे सुधार उपायों का समर्थन किया, इन फैसलों के प्रति विश्वास जताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के समर्थन के लिए अपनी सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों का हवाला देते हुए कहा, हमने सुधारों के पहले ‘सुरक्षा कवच’ तैयार किया.