नई दिल्ली. यदि आप इस साल कैलाश मानसरोवर की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपके लिए यह खबर काम की है. क्योंकि इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की अंतिम तिथि में अब मात्र 10 दिन बचे हैं. विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने कैलाश मानसरोवर यात्रा की सूचना जारी की थी. इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराने की तिथि 20 फरवरी से लेकर 23 मार्च तक घोषित की गई है. यानी हिमालय की इस यात्रा के लिए आपको 23 मार्च से पहले तक आवेदन करना होगा. इस वर्ष यह यात्रा 8 जून से शुरू होकर 8 सितंबर तक चलेगी. Also Read - ताजमहल सहित देश भर के स्मारक खुलेंगे, जानिए कब से मिलेगा घूमने का मौका

इस बार नाथू ला दर्रे से भी जा सकेंगे श्रद्धालु
इस साल तीर्थयात्री सिक्किम के नाथु ला दर्रे से भी मानसरोवर की यात्रा कर सकते हैं. पिछले साल डोकलाम गतिरोध के कारण चीन ने इस मार्ग से यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था. चीन ने इसके पीछे तर्क ये दिया था कि नाथू ला मार्ग पर सुरक्षित और सुचारू यात्रा के लिए स्थिति अच्छी नहीं है. वैसे आपको बता दें कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा के दो पारंपरिक मार्गों में पहला उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा का मार्ग है तो दूसरा सिक्किम का नाथू ला दर्रा. पिछले महीने विदेश राज्य मंत्री वी.के. सिंह ने कहा था कि चीन और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच वार्ता के बाद पड़ोसी देश ने नाथू ला दर्रे से यात्रा की अनुमति दे दी है. Also Read - 'इंडिया' शब्‍द हटाकर 'भारत' या 'हिंदुस्तान' करने की पिटीशन पर SC में 2 जून को सुनवाई

सिक्किम में पड़ता नाथू ला दर्रा मार्ग. (फोटो साभारः twitter) Also Read - भारत में जून-जुलाई में तबाही मचा सकता है कोरोना वायरस, अपने चरम पर होगा संक्रमण

सिक्किम में पड़ता नाथू ला दर्रा मार्ग. (फोटो साभारः twitter)

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए ये हैं नियम
कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को प्रतिकूल हालात, अत्यंत खराब मौसम में ऊबड़-खाबड़ भू-भाग से होते हुए 19,500 फुट तक की चढ़ाई चढ़नी होती है. ऐसे में यह यात्रा उन लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है जो शारीरिक और चिकित्सा की दृष्टि से तंदुरुस्त नहीं हैं. इसलिए यात्रा से पहले सरकार भी यात्रियों की जांच कराती है. और वैसे भी स्वस्थ व्यक्तियों को ही इस यात्रा की सलाह दी जाती है. यह यात्रा सिर्फ वही लोग कर सकते हैं जो भारतीय नागरिक हैं. विदेशियों को इस यात्रा की अनुमति नहीं है. यात्री के पास इस साल के 1 सितंबर को कम से कम 6 महीने की शेष वैधता का पासपोर्ट होना चाहिए. आवेदकों को 1 जनवरी 2018 तक कम से कम 18 वर्ष का और अधिक से अधिक 70 वर्ष का होना चाहिए. उसका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 या उससे कम होना चाहिए.

कैलाश मानसरोवर की यात्रा अत्यंत कठिन परिस्थितियों में की जाती है. (फोटो साभारः कुमाऊं विकास निगम)

कैलाश मानसरोवर की यात्रा अत्यंत कठिन परिस्थितियों में की जाती है. (फोटो साभारः कुमाऊं विकास निगम)

 

यात्रा के लिए कैसे होगा आपका चयन
कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं का चयन विदेश मंत्रालय करता है. मंत्रालय निष्पक्ष तरीके से कंप्यूटर आधारित प्रणाली के अनुसार ड्रॉ से यात्रियों का चयन करता है. चयन के बाद ही यात्रियों को उनका मार्ग और बैच नंबर दिया जाता है. आप अगर अपने किसी परिचित के साथ यात्रा करना चाहते हैं तो दोनों को एक ही बैच में रखने का विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि यह विदेश मंत्रालय तय करेगा कि दोनों यात्रियों का बैच एक रखा जाए या नहीं. कंप्यूटरीकृत ड्रा में आपका नाम आने पर आपको ई-मेल आईडी या मोबाइल नंबर पर सूचना दी जाएगी. वैसे मंत्रालय इसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी करता है, जिस पर फोन कर आप ड्रॉ में अपने नाम होने या न होने की जानकारी ले सकते हैं.

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बुजुर्गों के लिए नाथू ला का रास्ता सही
बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने के लिए नाथू ला दर्रे का रास्ता चुनना चाहिए. हालांकि लिपुलेख दर्रे के मुकाबले इस मार्ग से यात्रा का खर्च थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन गाड़ियों के लिए सुगम रास्ते के कारण बुजुर्गों की दृष्टि से यह मार्ग सही है. विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी में भी कहा गया है कि नाथुला दर्रे वाला मार्ग वाहन चलने लायक है. इस पर सिर्फ 36 किलोमीटर की ही ट्रेकिंग करनी पड़ती है. यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए अनुकूल है जो कष्टसाध्य ट्रेकिंग करने में असमर्थ हैं. इस मार्ग से 21 दिनों की इस यात्रा का खर्च करीब 2 लाख रुपए तक आता है.

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ट्रेकिंग और रोमांच के लिए लिपुलेख का रास्ता चुनें
युवा तीर्थयात्रियों के लिए उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे का रास्ता मुफीद है, क्योंकि इस रास्ते में उन्हें पहाड़ों की कठिन चढ़ाई के रोमांच का आनंद मिलेगा. कुमाऊं मंडल विकास निगम की वेबसाइट के अनुसार कैलाश मानसरोवर की संपूर्ण यात्रा के दौरान लिपुलेख दर्रा मार्ग से श्रद्धालुओं को करीब 200 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है. इसलिए बुजुर्गों को इस रास्ते से यात्रा करने की सलाह नहीं दी जाती है. इस मार्ग से यात्रा पर प्रति व्यक्ति करीब 1.6 लाख रुपए खर्च आने का अनुमान है. वहीं, इस मार्ग से यात्रा करने में लगभग 24 दिन लगते हैं.