नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि अयोध्या में केवल राम मंदिर बनेगा. भागवत ने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही राम मंदिर पर अध्यादेश के संबंध में कोई फैसला हो सकता है, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि केन्द्र अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सभी प्रयास करने को तैयार है. बुधवार को इससे पहले, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने कहा कि हिन्दू राम मंदिर पर अदालत के फैसले के लिए ‘अनंतकाल तक’ इंतजार नहीं कर सकते और इसके निर्माण की दिशा में आगे बढने का एकमात्र रास्ता कानून बनाना है.

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राम मंदिर से जुड़े एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा, ‘अयोध्या में सिर्फ राम मंदिर बनेगा. उन्होंने कहा, ‘हमारी भगवान राम में आस्था है. वह समय बदलने में समय नहीं लेते. आरएसएस प्रमुख नागपुर में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आरएसएस मंदिर मुद्दे पर उसके महासचिव भैयाजी जोशी द्वारा दिए गए बयान पर अडिग है.जोशी ने मंगलवार को कहा था कि आम जनता और सत्ता में मौजूद लोग चाहते हैं कि अयोध्या में विवादित भूमि पर राम मंदिर बने.

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गौरतलब है कि राम मंदिर मामले में अध्यादेश से जुड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को कटाक्ष करते हुए कहा था कि यह बात साफ हो गई है कि मोदी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बात नहीं मानते. कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने अपनी टिप्पणी से अयोध्या मामले को लेकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘हमारा ये मानना है कि राम मंदिर मुद्दे पर जो निर्णय न्यायालय से आएगा, वह सब पक्षों को मानना चाहिए और सरकार को उसको लागू करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए. परंतु मोदी जी ने यह कहकर तो उसको भी पचड़े में डाल दिया कि निर्णय के बाद भी अध्यादेश लाएंगे.

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उन्होंने कहा, ‘इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने आरएसएस और भाजपा की मांग को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, एक बात और साफ हो गई कि न वह मोहन भागवत जी की बात मानते हैं और न भाजपा नेताओं की और न किसी और व्यक्ति विशेष की. मुझे उम्मीद है कि उनकी पार्टी के लोगों को अब ये बात समझ आ गई होगी. प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद आरएसएस ने कहा था कि मोदी इस सरकार के कार्यकाल में ही मंदिर का वादा पूरा करें ऐसी भारत की जनता की अपेक्षा है.