नई दिल्ली: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस कदम की निंदा की है, जिसमें सरकार ने उन लोगों के लिए नारंगी रंग का पासपोर्ट लाने का फैसला किया है, जिन्होंने 10वीं कक्षा की परीक्षा नहीं पास की है. चांडी ने केंद्र के इसे भेदभावपूर्ण नीति बताया. Also Read - राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह से इस राज्य का प्रभार वापस लिया,चांडी को दी जिम्मेदारी

चांडी ने कहा, किसी भी तरह से इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए. यह दो अलग-अलग तरह के नागरिकों में भेद होगा. एक जो शिक्षित हैं और दूसरे जो अशिक्षित हैं, शैक्षिक योग्यता के आधार पर यह भारतीय लोगों को साथ भेदभाव है. Also Read - Aden will be made clear in the Indian lodging | अदन में खाली कराया जाएगा भारतीय वृद्धाश्रम

उन्होंने कहा, अगर ऐसा सच में हो जाता है तो जिस क्षण नारंगी रंग के पासपोर्ट धारक विदेशी सरजमीं पर कदम रखेंगे, उनके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार होगा और इसका असर उन लोगों के चरित्र और व्यक्तित्व पर पड़ेगा. ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए. चांडी ने कहा कि हमारे कई देशवासियों ने मध्यपूर्व के देशों में मुश्किल परिस्थितियों में रहकर कड़ी मेहनत की है और उनकी कड़ी मेहनत द्वारा अर्जित की गई कमाई की भेजी गई रकम ने राज्य और देश की प्रगति में योगदान दिया है. Also Read - Car accident narrowly surviving chandi | कार दुर्घटना में बाल-बाल बचे चांडी

यहां स्थित विकास अध्ययन केंद्र में आव्रजन विभाग के प्रमुख एस. इरुदयाराजन ने भी प्रस्तावित कदम की निंदा की. उन्होंने कहा, हमारे अध्ययन के अनुसार केरल के 25 लाख प्रवासियों में से लगभग 15 फीसदी ने 10वीं पास नहीं की है तो अन्य बड़े राज्यों में यह आंकड़ा 50 फीसदी से ज्यादा होगा. इरुदयाराजन ने कहा कि नागरिकों को शैक्षिक योग्यता के आधार पर बांटने को मंजूर नहीं किया जाएगा. इस प्रस्ताव को निरस्त करना चाहिए.