Operation Sindoor: मिसाइलें गिरीं पाकिस्तान में, चोट लगी चीन को...कैसे भारत के वार से बैकफुट पर चली गई चीनी डिफेंस इंडस्ट्री?

ऑपरेशन सिंदूर से पहले कई देश चीन से हथियार खरीदने को लेकर बातचीत कर रहे थे. लेकिन इस ऑपरेशन के बाद चीनी हथियारों के खरीददार घट गए हैं.

Published date india.com Published: December 15, 2025 1:21 PM IST
(Operation Sindoor Symbolic image)
(Operation Sindoor Symbolic image)

Operation Sindoor crushed China’s defense industry: ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के स्वदेशी हथियरों, देश में विकसित की गई तकनीक और तीनों सेनाओं की ताकत से दुनिया को परिचित कराया. इस सैन्य झड़प में सीधे हमले का निशाना तो पाकिस्तान बना लेकिन चोट चीन को लगी है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन की डिफेंस इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा है.

चीन को क्यों और कैसे लगा झटका?

इस समय पाकिस्तानी सेनाओं के पास मौजूद 80 प्रतिशत हथियार, उपकरण और तकनीक चीन की हैं. पाकिस्तान ने इस टकराव के दौरान चीनी फाइटर जेट, चीनी मिसाइलों और चीनी एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया. चीन में बने रडार न तो भारत की मिसाइलों को ट्रैक कर सके, न ही एचक्यू-9 जैस एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोक सके. यही नहीं चीन में बने के कई जेएफ-10 विमान भी मार गिराए गए जिनका इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना कर रही थी.

चीनी हथयारों की साख घटी

ऑपरेशन सिंदूर से पहले कई देश चीन से हथियार खरीदने को लेकर बातचीत कर रहे थे. लेकिन इस ऑपरेशन के बाद चीनी हथियारों के खरीददार घट गए हैं. यहां तक कि बांग्लादेश ने भी चीन से जेएफ-10 लड़ाकू विमान खरीदने से इन्कार कर दिया जबकि चीन इसे किफायती कीमत पर बेचने को तैयार था.

भारतीय हथियारों की डिमांड बढ़ी

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने कई तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया था. लेकिन जिन दो हथियारों को सबसे ज्यादा चर्चा मिली वो थे देसी एयर डिफेंस सिस्टम आकाश और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस. ब्रह्मोस मिसाइल और आकाश एयर डिफेंस प्रणाली खरीदने के लिए दुनिया के कई देश आगे आए हैं. हाल ही में इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस डील के लिए भारत के साथ बातचीत शुरू की है.

ये देश खरीदना चाहते हैं ब्रह्मोस मिसाइल

फिलीपींस पहला देश था जिसने भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की डील की थी. इसके बाद इंडोनेशिया भी बातचीत कर रहा है. वियतनाम, मलेशिया और मध्य पूर्व के कई देशों जैसे UAE, सऊदी अरब, मिस्र ने भी इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाई है. इनमे कई ऐसे देश हैं जो समंदर में चीन की दादागिरी से परेशान हैं. ये देश ब्रह्मोस मिसाइल का एंटी शिप वर्जन खरीदना चाहते हैं.

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