नई दिल्ली: नीति आयोग की बैठक में रविवार को विपक्षी एकता देखने को मिली. इस दौरान गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जोर देकर कहा कि केंद्र को सहकारी संघवाद का पालन करना चाहिए और राज्यों के मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. केंद्रीय धन के आवंटन और 15 वें वित्त आयोग की रिपोर्ट जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके विपक्षी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों ने राजग सरकार पर संविधान के संघीय ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया.

उठाया कर्जमाफी का मुद्दा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक के बाद कहा, मेरे ख्याल से केंद्र को सहकारी संघवाद का पालन करना चाहिए और राज्य के मामलों में गैर-जरूरी दखल नहीं देना चाहिए. केंद्र को सहकारी संघीय ढांचे को मजबूत बनाना चाहिए. आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किसानों के कृषि ऋण माफी का मुद्दा उठाया. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने अपने संबोधन में इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र की तरफ से 50 प्रतिशत मदद की मांग की.

15वें वित्त आयोग के मुद्दे पर शंका
पन्द्रहवें वित्त आयोग के मुद्दे पर विपक्षी मुख्यमंत्रियों ने अपनी शंकाएं जाहिर कीं और केंद्र से इसकी शर्तों को नये सिरे से परिभाषित करने का आग्रह किया. इस बीच, ममता बनर्जी ने नीति आयोग के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि यह राज्यों के लिए कुछ नहीं करता है. ममता बनर्जी ने कहा कि जब उन्होंने तीन अन्य मुख्यमंत्रियों के साथ दिल्ली में राजनीतिक संकट का मुद्दा उठाया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई आश्वासन नहीं दिया.

केजरीवाल के मुद्दे पर चुप रहे पीएम
ममता, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और केंद्र से इस मुद्दे को सुलझाने की अपील की. बैठक के बाद ममता ने कहा, हमने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाया. हमने उनसे कहा कि लोगों की खातिर गतिरोध सुलझाया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा, लेकिन राजनाथ सिंह ने कहा कि वह मामले पर गौर करेंगे. हमें जो भी कहना था वह हमने कहा, अब उन्हें इसे सुलझाना है. अब यह उनका मामला है.

राजनीतिक संकट बताया
ममता, विजयन, नायडू और कुमारस्वामी शनिवार को केजरीवाल के आवास पर गए थे. उन्होंने इस मुद्दे पर पीएम मोदी के दखल की मांग की थी. गतिरोध को राजनीतिक संकट करार देते हुए विपक्षी नेताओं ने कहा था कि किसी राजनीतिक संकट की वजह से लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए. केजरीवाल और उनके तीन मंत्री पिछले कुछ दिनों से राज निवास के एक प्रतीक्षा कक्ष में धरना दे रहे हैं. उनकी मांग है कि उप-राज्यपाल दिल्ली सरकार में तैनात आईएएस अधिकारियों से अपनी हड़ताल वापस लेने को कहें.