video conference meeting of 22 opposition parties:: कांग्रेस समेत देश के 22 विपक्षी दलों ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चक्रवात अम्फान से हुए जानमाल के भारी नुकसान पर दुख जताते हुए शुक्रवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दोनों राज्यों की मदद की जाए. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हुई विपक्षी दलों की बैठक में ‘अम्फान’ के कारण मारे गए लोगों की याद में कुछ पल के लिए मौन रखा गया. Also Read - सोनिया गांधी की मोदी सरकार से डिमांड- जरूरत मंदों और प्रवासी मजदूरों को केंद्र 7,500 रुपये दे

इन पार्टियों ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा, ‘‘देश के लोग कोविड-19 का मुकाबला करते हुए अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उसी दौरान चक्रवात अम्फान का आना दोहरा झटका और लोगों को भावनाओं को तोड़ने वाला है.’’ उन्होंने केंद्र से आग्रह किया, ‘‘दोनों राज्यों के लोगों को सरकारों एवं देशवासियों से तत्काल मदद और एकजुटता की जरूरत है. विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार से आग्रह करती हैं कि इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और फिर इसी के मुताबिक राज्यों को मदद दी जाए.’’ Also Read - Amphan Cyclone: बंगाल सरकार ने की थी मांग, अम्फान से प्रभावित कोलकाता व पड़ोसी जिलों में तैनात की गई सेना

विपक्षी दलों ने कहा, ‘‘फिलहाल राहत और पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. परंतु इस आपदा के परिणामस्वरूप कई दूसरी बीमारियां पैदा होने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. इसलिए हम केंद्र सकार का आह्वान करते हैं कि वह दोनों राज्यों के लोगों की मदद करे.’’ विपक्ष की बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत 22 दलों के नेता शामिल हुए. Also Read - अम्फान तूफ़ान: मृतकों की संख्या 85 हुई, ममता बनर्जी ने कहा- अभी श्रमिक ट्रेनें राज्य में न भेजें

22 विपक्षी दलों की इस वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि जाने-माने हर अर्थशास्त्री ने बड़े स्तर पर वित्तीय प्रोत्साहन की तत्काल आवश्यकता की सलाह दी थी. PM द्वारा 20 लाख करोड़ के ​पैकेज की घोषणा और अगले 5 दिनों तक वित्त मंत्री द्वारा उसकी जानकारी देना एक क्रूर मजाक बन गया है.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लॉकडाउन से बाहर आने के लिए सरकार के पास कोई रणनीति नहीं होने का दावा करते हुए शुक्रवार को कहा कि संकट के इस समय भी सारी शक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक सीमित हैं. प्रमुख विपक्षी दलों की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हुई बैठक में उन्होंने यह भी कहा कि इस सरकार में संघवाद की भावना को भूला दिया गया है और विपक्ष की मांगों को अनसुना कर दिया गया.

उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध को 21 दिनों में जीतने की प्रधानमंत्री की शुरुआती आशा सही साबित नहीं हुई. ऐसा लगता है कि वायरस दवा बनने तक मौजूद रहने वाला है. मेरा मानना है कि सरकार लॉकडाउन के मापदंडों को लेकर निश्चित नहीं थी. उसके पास इससे बाहर निकलने की कोई रणनीति भी नहीं है.’’

सोनिया के मुताबिक, हममें से कई समान विचारधारा वाली पार्टियां मांग कर चुकी हैं कि गरीबों के खातों में पैसे डाले जाएं, सभी परिवारों को मुफ्त राशन दिया जाए और घर जाने वाले प्रवासी श्रमिकों को बस एवं ट्रेन की सुविधा दी जाए. हमने यह मांग भी की थी कि कर्मचारियों एवं नियोजकों की सुरक्षा के लिए ‘वेतन सहायत कोष’ बनाया जाए. हमारी गुहार को अनसुना कर दिया गया. उन्होंने कहा, ‘‘ कई जानेमाने अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि 2020-21 में हमारे देश की विकास दर -5 प्रतिशत हो सकती है. इसके नतीजे भयावह होंगे.’’ सोनिया ने कहा, ‘‘मौजूदा सरकार के पास कोई समाधान नहीं होना चिंता की बात है, लेकिन उसके पास गरीबों एवं कमजोर वर्ग के लोगों के प्रति करूणा का नहीं होना हृदयविदारक बात है.’’