Delhi: देश की राजधानी में आज गुरुवार को कांग्रेस समेत अन्‍य विपक्ष दलों के नेताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर राहुल गांधी समेत विपक्ष के अन्य नेताओं ने संसद भवन से विजय चौक तक मार्च किया. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पेगासस जासूसी मामला, केंद्रीय कृषि कानूनों और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर बृहस्पतिवार को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. वहीं, बीजेपी ने विपक्ष पर पलटवार किया है.Also Read - UP Election 2022: अमित शाह की जाट नेताओं से मीटिंग, BJP सांसद के प्रस्‍ताव पर जयंत चौधरी ने दिया जवाब

कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा, हमने सरकार से पेगासस पर बहस करने के लिए कहा, लेकिन सरकार ने पेगासस पर बहस करने से मना कर दिया. हमने संसद के बाहर किसानों का मुद्दा उठाया और हम आज यहां आपसे (मीडिया) बात करने आए हैं, क्योंकि हमें संसद के अंदर नहीं बोलने दिया गया. ये देश के लोकतंत्र की हत्या है. राहुल गांधी ने यह भी कहा, राज्यसभा में पहली बार सांसदों की पिटाई की गई, बाहर से लोगों को बुलाकर और नीली वर्दी में डालकर सांसदों से मारपीट की गई. Also Read - UP Elections 2022: Congress ने यूपी चुनाव के लिए 89 और उम्मीदवारों के नाम घोषित किए, देखें List

विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद भवन से विजय चौक तक मार्च के बाद राज्यसभा में कल की घटना से अवगत कराने के लिए सभापति एम. वेंकैया नायडू से मुलाकात की है. Also Read - Punjab Polls 2022: नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ अमृतसर पूर्व से चुनाव लड़ेंगे SAD नेता बिक्रम सिंह मजीठिया

वहीं, बीजेपी ने विपक्ष पर पलटवार किया है. बीजेपी प्रवक्‍ता संबित पात्रा ने कहा, ”जिस प्रकार का व्यवहार आज कांग्रेस पार्टी और कुछ अन्य विपक्षी पार्टियां सड़क पर उतरकर कर रही हैं. जिस प्रकार अराजकता संसद के अंदर विपक्षी पार्टियों और खासकर राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने दिखाया है उससे पूरा देश और लोकतंत्र शर्मसार हुआ है.

बीजेपी प्रवक्‍ता पात्रा ने कहा, संसद के इतिहास में पहली बार हुआ है कि लॉबी में कांच का गेट तोड़ दिया गया, जिससे एक सुरक्षाकर्मी भी हताहत हुई है. वो भी अस्पताल में है. ये वही विपक्षी हैं, जो कह रहे थे कि संसद का एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए मगर जब सत्र चल रहा था, कोरोना पर एक दिन भी चर्चा नहीं होने दी.

राहुल गांधी ने कहा, ” हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री इस देश को बेचने का काम कर रहे हैं, हिंदुस्‍तान के प्रधानमंत्री दो-तीन उद्योगपतियों को हिंदुस्‍तान की आत्मा बेच रहे हैं. इसलिए विपक्ष सदन के अंदर किसानों, बेरोज़गारों, इंश्योरेंस बिल और पेगासस की बात नहीं कर सकता है.

जंतर-मंतर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, ” नरेंद्र मोदी किसानों पर अत्याचार करते हैं, जो उनका है वो उनसे ​छीनते हैं और फिर​ किसानों को देशद्रोही और ​खालिस्तानी कहते हैं.”

शिवसेना के राज्‍य सभा सांसद संजय राउत ने कहा, ”हमने कल लोकतंत्र की हत्या होते देखी, राज्यसभा में कल जिस तरह से प्राइवेट लोगों ने मार्शल की ड्रेस में आकर हमारे सांसदों पर हमला करने की कोशिश की. ये मार्शल नहीं थे, संसद में मार्शल लॉ लगाया गया था.

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में बैठक करने के बाद विपक्षी नेताओं ने संसद भवन से विजय चौक तक पैदल मार्च किया. इस दौरान कई नेताओं ने बैनर और तख्तियां ले रखी थीं. बैनर पर ‘हम किसान विरोधी काले कानूनों को निरस्त करने की मांग करते हैं’ लिखा हुआ था. विपक्षी नेताओं ने ‘जासूसी बंद करो’, ‘काले कानून वापस लो’ और ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’ के नारे भी लगाए.

इससे पहले इससे पहले, विपक्षी नेताओं की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश एवं आनंद शर्मा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव, द्रमुक के टी आर बालू, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और कई अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए.

इस बैठक में पेगासस जासूसी मामला, कृषि कानून, महंगाई और बुधवार को राज्यसभा में ‘सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में’ विधेयक पारित कराये जाने तथा कुछ महिला सांसदों के साथ कथित धक्कामुक्की को लेकर भी चर्चा की गई.

बता दें कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को आरोप लगाया कि सदन में विरोध प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद कुछ महिला सुरक्षाकर्मियों ने विपक्ष की महिला सदस्यों के साथ धक्कामुक्की की और उनका अपमान किया. हालांकि सरकार ने उनके आरोप को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह ‘सत्य से परे’ है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने भी संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपने 55 साल की संसदीय राजनीति में ऐसे स्थिति नहीं देखी कि महिला सांसदों पर सदन के भीतर हमला किया गया हो.