अमरावती. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराने और विपक्षी दलों का गठबंधन बनाने की कवायद एक बार फिर तेज होती दिख रही है. इसे कर्नाटक में हुए लोकसभा के उपचुनावों में जीत का असर कहें या वर्तमान में 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले ओपिनियन पोल का प्रभाव, भाजपा विरोधी सभी विपक्षी दल फिर से एक मंच पर आने की तैयारी करते दिख रहे हैं. इसके संकेत आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी के सुप्रीमो एन. चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naydu) ने दिए हैं. नायडू ने शनिवार को कहा कि भाजपा विरोधी सभी दल आगामी 22 दिसंबर को नई दिल्ली में बैठक करेंगे. इसमें भाजपा विरोधी एक साझा मंच बनाने और भविष्य की योजना बनाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा.

तेदेपा अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को आंध्रप्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत के साथ बैठक की. इसके बाद हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भाजपा विरोधी दलों को मिलाकर साझा मंच बनाने और भविष्य की योजना के संबंध में बैठक की जानकारी दी. कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत के साथ यहां अपने रिवरफ्रंट आवास पर बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष ने कहा कि हमारी कोशिश भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लड़ने के लिए सभी को एक मंच पर लाना है. गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दूत बनकर यहां आए थे. सियासी जानकार नायडू और गहलोत की इस मुलाकात को महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देख रहे हैं.

नायडू ने कहा कि वह 19 या 20 नवंबर को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे. बता दें कि इससे पहले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय भाजपा विरोधी सभी दलों की एकता सबसे पहले दिखी थी. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद ही औपचारिक रूप से महागठबंधन बनाने के संबंध में बातें हुई थीं. लेकिन बाद के दिनों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और बसपा के तालमेल न होने, ममता बनर्जी के अलग रुख अपनाने, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के साथ कांग्रेस के अलग रहने को लेकर इस गठबंधन पर संशय के बादल मंडराने लगे थे. लेकिन बीते दिनों जब कर्नाटक में लोकसभा की 4 सीटों पर उपचुनावों के परिणाम में कांग्रेस और जेडीएस को तीन सीटें हासिल हुईं, उसके बाद एक बार फिर भाजपा विरोधी दलों के एक मंच पर आने का रास्ता साफ होने लगा है. अब अगर आगामी 22 नवंबर को भाजपा विरोधी दल एक मंच पर आने को राजी हो जाते हैं, तो इसका प्रभाव न सिर्फ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा, बल्कि इसी महीने और दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में इसकी झलक देखने को मिलेगी.

(इनपुट – एजेंसी)