Farmers Bills 2020: विपक्ष के भारी विरोध के बीच राज्यसभा (Rajya Sabha) में किसानों से जुड़े दो विधेयक पेश किये गये. कृषि मंत्री ने बिल पेश करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया तो वहीं, कांग्रेस (Congress), टीएमसी (TMS), समाजवादी पार्टी (SP) ने इसका विरोध किया. बीजेपी से साथ माने जा रहे है BJD ने भी बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की. उधर, कृषि मंत्री के बयान के बीच विपक्ष का जोरदार हंगामा देखने को मिला और इस दौरान विपक्षी सांसदों ने उपसभापति की माइक भी तोड़ दी. कृषि मंत्री के बयान के दौरान TMC आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसदों ने बेल में पहुंचकर हंगामा किया और बिल के विरोध में जमकर नारेबाजी की. Also Read - संसद के मानसून सत्र की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, कई रिकॉर्ड बने

हंगामे के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओब्रायन ने रूल बुक फाड़ दी. इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. हंगामे के बीच कृषि मंत्री ने अपनी बात पूरी की और बिल को लेकर आए संशोधन प्रस्ताव पर वोटिंग शुरू हुई. ध्वनिमत से संशोधन प्रस्ताव खारिज होने के बाद मतविभाजन की मांग को लेकर अभूतपूर्व हंगामा हुआ.

इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री और JDS सांसद एचडी देवगौड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि महामारी के दौरान बिल पास करने की जल्दबाजी क्यों है? उन्हें यह बताना चाहिए कि लघु और दीर्घावधि में कृषक समुदाय के लिए खेती के बिल क्या करेंगे और इससे किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य को प्राप्त करने में कैसे मदद मिलेगी?

उधर, कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि दोनों विधेयक किसानों की आत्मा पर चोट हैं. उन्होंने कहा कि यह गलत तरीके से तैयार किए गए हैं तथा गलत समय पर पेश किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अभी हर दिन कोरोना वायरस के हजारों मामले सामने आ रहे हैं और सीमा पर चीन के साथ तनाव है. बाजवा ने आरोप लगाया कि सरकार का इरादा एमएसपी को खत्म करने का और कार्पोरेट जगत को बढ़ावा देने का है. उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ने नए कदम उठाने के पहले किसान संगठनों से बातचीत की थी ?

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विधेयक देश के संघीय ढांचे के साथ भी खिलवाड़ है. उन्होंने कहा कि जिन्हें आप फायदा देना चाहते हैं, वे इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. ऐसे में नए कानूनों की जरूरत क्या है? उन्होंने कहा कि देश के किसान अब अनपढ़ नहीं हैं और वह सरकार के कदम को समझते हैं. बाजवा ने सवाल किया कि अगर सरकार के कदम किसानों के पक्ष में हैं तो भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी अकाली दल क्यों इसका विरोध कर रही है? बाजवा ने बिलों पर चर्चा के दौरान बोलते हुए इसे ‘किसानों का डेथ वारंट’ बता दिया और कहा कि हमारी पार्टी किसी भी कीमत पर इस पर साइन नहीं करेगी.