नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बार में तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है. कानून मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के बाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि यह अध्यादेश मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है. ये मुस्लिम महिलाओं को किसी तरह से न्याय नहीं दिला सकता है.

ओवैसी ने कहा, इस्लाम में निकाह एक सिविल कॉन्ट्रेक्ट है. इसे दंडात्मक प्रावधान में लाना गलत है. उन्होंने इस अध्यादेश को असंवैधानिक भी करार दिया है. उन्होंने कहा, अध्यादेश संविधान से मिले समानता के अधिकार के खिलाफ है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और वीमेन ऑर्गेनाइजेशन को इस अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनी चाहिए.

उन्होंने कहा, मैं प्रधानमंत्री से मांग करता हूं कि इस देश को उन शादीशुदा महिलाओं के लिए कानून की जरूरत है, जिनके पति ने चुनावी हलफनामा में खुद को शादीशुदा बताया है, लेकिन उनकी पत्नी उनके साथ नहीं रहती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं की संख्या 24 लाख है और वह उनके लिए न्याय की मांग करता हूं.

बता दें कि कानून मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी. ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन यह राज्यसभा में लंबित है. वहां पर सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है. उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष इस प्रथा पर रोक लगा दी थी. यह प्रथा अब भी जारी है इसलिए इसे दंडनीय अपराध बनाने की खातिर विधेयक लाया गया है.