नई दिल्ली। तमाम विवाद और बहस के बावजूद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शरियत कोर्ट के गठन पर अड़ा हुआ है. हालांकि उसके सुर थोड़ नरम जरूर पड़े हैं. बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने आज प्रेस कांफ्रेंस कर एक बार फिर इसके औचित्य पर जवाब दिया. उन्होंने इसका विरोध किए जाने को लेकर बीजेपी-संघ को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि जानबूझकर इसे लेकर राजनीति की जा रही है.

पूरी जिम्मेदारी से कर रहे काम

जिलानी ने कहा कि शरिया अदालत की दिशा में बोर्ड पूरी जिम्मेदारी के काम कर रहा है. जागरूकता के लिए बोर्ड देशभर में वर्कशॉप का आयोजन करेगा. उन्होंने कहा, शरिया बोर्ड कोई कोर्ट नहीं है, बीजेपी और आरएसएस शरिया कोर्ट के नाम पर राजनीति कर रही है. हमने कभी भी नहीं कहा देश के सभी जिलों में शरियत कोर्ट का गठन करेंगे. हमारा लक्ष्य है कि उनका गठन ऐसे जिलों में हो जहां इसकी बहुत जरूरत है और वहां के लोग इसकी मदद लेना चाहते हों.

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AIMPLB ने मचाई हलचल

बता दें कि कुछ दिन पहले ही ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देशभर में शरिया बोर्ड के गठन का ऐलान कर हलचल मचा दी थी. सवाल उठ रहे हैं कि क्या शरियत कोर्ट अदालतों के समकक्ष काम करेंगी? इसे लेकर बहस और सियासत का दौर जारी है. उधर, बोर्ड अपने फैसले पर अड़ा हुआ है. उसका कहना है कि उसका मकसद देश की न्यायिक व्यवस्था के मुकाबले अलग से अदालत बनाना नहीं है, शरियत कोर्ट मुस्लिमों के आपसी विवाद को हल करेगी.

शरियत कोर्ट पर सियासत

शरियत कोर्ड को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है. बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर हमलावर हैं. बीजेपी ने इसका खुलकर विरोध करते हुए कांग्रेस को निशाने पर लिया है. बीजेपी ने कांग्रेस की तरफ सवाल उछाला है कि क्या वह ऐसी अदालतों का विरोध करती है?

हाल ही में बीजेपी नेता और केंद्रीय रक्षा मंत्री सीतारमन ने कहा था कि कांग्रेस नेता शशि थरूर ‘हिन्दू पाकिस्तान’ का जिक्र कर चुके हैं. उससे पहले उनके ही नेता भगवा आतंकवाद का शब्द गढ़ चुके हैं. कर्नाटक कांग्रेस के एक नेता शरिया अदालतों का समर्थन कर चुके हैं. उन्होंने कहा, हम राहुल गांधी जी से पूछना चाहते हैं कि क्या वो शरिया अदालतें लागू करने के समर्थन में हैं?