नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए धर्म कोई पैमाना नहीं है. गृह मंत्रालय का बयान एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी द्वारा केंद्र पर मुसलमानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाने के बाद आया है. ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की थी कि वह बताएं कि कितने मुस्लिमों को केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों समेत अन्य क्षेत्रों में सरकारी नौकरियां मिली हैं. गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा , ‘ अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए धर्म पैमाना नहीं है. भर्ती प्रक्रिया में किसी धर्म के लिए कोई गुंजाइश नहीं है. Also Read - CoronaVirus Vaccine Price: जल्द मिलेगी कोरोना वैक्सीन, क्या होगी कीमत, कैसे लगेगा टीका, जानिए

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हैदराबाद में किए गए संवाददाता सम्मेलन में ओवैसी ने पूछा था ,‘बीते चार बरस में केंद्र के तहत आने वाले क्षेत्रों चाहे वे बैंक हों, रेलवे हो, केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल हों … कितने अल्पसंख्यकों को भर्ती किया गया.सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी और असम रायफल्स केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल हैं और ये गृह मंत्रालय के मातहत काम करते हैं. इनकी कुल क्षमता करीब 10 लाख है.

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गौरतलब है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नेता असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र पर मुसलमानों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह बताने की मांग की थी कि समुदाय से कितनों को केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की नौकरियों सहित सरकारी नौकरियां मिली हैं? उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से यह कहा गया है कि केंद्र सरकार की नौकरियों में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तमाम कोशिशें की जाएंगी , लेकिन इसके बावजूद इसे लेकर शायद ही कुछ किया गया.

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उन्होंने दावा किया कि राजग सरकार ने केंद्र सरकार के उपक्रमों में मुसलमानों को रोजगार मुहैया कराने के लिए कुछ ठोस नहीं किया और कहा , ‘‘ सीआरपीएफ , सीआईएसएफ , आईटीबीपी , सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक , ये सब केंद्र सरकार के अधीन आते हैं. मैं भारत सरकार और भाजपा सरकार से अनुरोध करता हूं कि वे कृपया आंकड़े पेश करें. ओवैसी ने कहा कि मौजूदा सरकार ने सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों से जुड़े आंकड़े पेश करने की परंपरा खत्म कर दी जो 2013 तक होता आया था.

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उन्होंने राजग सरकार के अधीन केंद्र सरकार की नौकरियों में मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़ने के अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के कथित दावे को भी खारिज कर दिया. सांसद ने कहा कि मीडिया में आयी एक खबर में दावा किया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स (एनएसजी) में एक ‘‘ एक भी मुसलमान ’’ नहीं है. जब एक पत्रकार ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती योग्यता के आधार पर होती है , ओवैसी ने कहा कि बहुलतावाद देश की पहचान है जो हर जगह दिखनी चाहिए.