नागपुर: सांसद असदुद्दीन ओवैसी और भारिप बहुजन महासंघ के नेता प्रकाश आंबेडकर ने अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान की निंदा की है. भागवत ने शुक्रवार को अपने संबोधन में कहा था कि शेर जब अकेला होता है तो कुत्ते उसका शिकार कर लेते हैं. उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को प्रभुत्व की कोई आकांक्षा नहीं है और समुदाय तभी समृद्ध होगा जब वह एक समाज के रूप में काम करेगा.

उन्होंने कहा था, ‘‘अगर एक शेर अकेला है तो जंगली कुत्ते आक्रमण करके शेर को खत्म कर सकते हैं. हमें यह नहीं भूलना चाहिए.’’ भागवत ने कहा, ‘‘हम दुनिया को बेहतर बनाना चाहते हैं. हमें प्रभुत्व की कोई आकांक्षा नहीं है. हमारा प्रभाव विजय अथवा औपनिवेशीकरण का परिणाम नहीं है.’’

आंबेडकर ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत में भागवत के इस बयान की निंदा की और दावा किया कि ‘‘कुत्ते’’ का संदर्भ देश की विपक्षी पार्टियों के लिए है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं मोहन भागवत की इस मानसिकता की निंदा करता हूं जिसमें उन्होंने देश की विपक्षी पार्टियों का जिक्र कुत्ते के रूप में किया है.’’ उन्होंने कहा कि पार्टियां सत्ता में आईं और गईं लेकिन यह मानसिकता सत्तापक्ष की यह सोच दिखाती है कि विपक्ष उनसे लड़ नहीं सकता. आंबेडकर ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि उन्हें सत्ता में दोबारा लाने से पहले लोगों को पुन: सोचना चाहिए.’’

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उन्होंने नई दिल्ली में राष्ट्रीय पदाधिकारियों और राज्य इकाई के अध्यक्षों की बैठक में ‘अजेय भाजपा’ के उनके नारे पर भी तंज किया. उन्होंने कहा, ‘‘वह(भाजपा) गुजरात में लगभग हार ही गए थे और कर्नाटक में हार गए. अब केवल दो महीने की ही बात है जब मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के चुनाव परिणाम आ जाएंगे.’’ वह कांग्रेस तथा अन्य पार्टियों के बीच गठबंधन के प्रति आश्वस्त दिखाई दिए.

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी भागवत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. ओवैसी से सवालिया लहजे में पूछा कि उनके बयान में शेर और कुत्ता कौन है. ओवैसी ने आगे कहा कि भारत का संविधान सभी मनुश्यों को एक समान मानता है. वह किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता. आरएसएस की समस्या यह है कि उसका देश के संविधान में विश्वास नहीं है.

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ओवैसी ने कहा कि संघ ऐसे ही दूसरों को कुत्ता और खुद को शेर बताकर उन्हें छोटा दिखाने की कोशिश करता है. मुझे भागवत के बयान पर कोई आश्चर्य नहीं हो रहा क्योंकि पिछले 90 साल से आरएसएस की ऐसी ही भाषा रही है. देश के लोग ऐसी अभद्र भाषा को कभी स्वीकार नहीं करेंगे.

 

इनपुट: एजेंसी