नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने जीएसटी प्रणाली की पहली वर्षगांठ पर इस कर प्रणाली को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने इसे लोगों पर कर बोझ बढ़ाने वाला ‘आरएसएस टैक्स’ बताया और कहा कि जीएसटी लोगों के बीच बुरा शब्द बनकर रह गया है. चिदंबरम ने पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यह वास्तविक जीएसटी नहीं है, यह कुछ अलग ही मामला है. Also Read - GST Collection March 2021: मार्च में जीएसटी का बंपर कलेक्शन, अभी तक की मेगा वसूली

जीएसटी का मतलब एक टैक्स दर Also Read - पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर सुशील मोदी ने कही ये बात, क्या घटेंगे दाम?

उन्होंने कहा कि जीएसटी का मतलब केवल एक टैक्स दर होना है. अगर (इसमें) कई दरें है तो इसे ‘आरएसएस टैक्स’ कहिए. इसमें कोई दोराय नहीं है कि जीएसटी का अभी आर्थिक वृद्धि पर कोई सकारात्मक असर नहीं दिखाई दिया है. पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी का डिजाइन, ढांचा, दर और जीएसटी का कार्यान्वयन इतना दोषपूर्ण है कि यह कारोबारी इकाइयों, व्यापारियों, निर्यातकों और आम लोगों के बीच ‘बुरा शब्द’ बनकर रह गया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पांच साल तक इस प्रस्ताव को रोके रखा था. Also Read - LIC के आईपीओ से किसी नौकरी नहीं जाएगी, निवेशकों और संस्था दोनों को फायदा होगा: केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर

कारोबारियों-नागरिकों में डर

उन्होंने कहा कि जीएसटी को लेकर अगर कोई एक वर्ग खुश है तो वह कर प्रशासन है जिसे इतने अधिक अधिकार मिल गए हैं कि आम कारोबारी व नागरिकों में डर है. चिदंबरम ने कहा कि यह आम धारणा बन गई है कि जीएसटी से आम नागरिक पर कर्ज बोझ बढ़ा है. इससे निश्चित रूप से कर बोझ कम नहीं हुआ है जैसा कि वादा किया गया था.

कांग्रेस लाई थी प्रस्ताव

उन्होंने कहा कि जीएसटी का प्रस्ताव मूल रूप से कांग्रेस लाई थी. यूपीए सरकार ने 2006 में पहली बार इसका प्रस्ताव किया. चार बार वित्त मंत्री रहे चिदंबरम ने कहा कि इस अप्रत्यक्ष कर ढांचे में आमूल चूल बदलाव के लिए विशेषज्ञों को समुचित अधिकार दिये जाने चाहिये.

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार ने जीएसटी के मामले में कई मौकों पर मुख्य आर्थिक सलाहकार की सलाह को दरकिनार किया. विशेषतौर से दरों के मामले में. जीएसटी को लेकर केन्द्र की भाजपा सरकार ने जो भी कदम उठाये वह पूरी तरह से दोषपूर्ण थे.