रोज खरीदते हैं पैकेज्ड फूड तो इस लेबलिंग को न करें इग्नोर, SC ने बताया ऐसा करना क्यों जरूरी

पैकेज्ड फूड की लेबलिंग हमें सिर्फ जागरूक करने में मदद करती है. ये इस बात की गारंटी नहीं है कि अब गंभीर बीमारियां नहीं होंगी. लेबलिंग सिर्फ हमें यह बताएगी कि फूड अनहेल्दी है, लेकिन अगर फिर भी हम उसे खाते हैं तो हम बीमारियों का रिस्क बढ़ा रहे होंगे.

Published date india.com Updated: February 18, 2026 10:47 PM IST
रोज खरीदते हैं पैकेज्ड फूड तो इस लेबलिंग को न करें इग्नोर, SC ने बताया ऐसा करना क्यों जरूरी
तस्वीर का इस्तेमाल सांकेतिक तौर पर किया गया है.

आज के समय में लोगों को सबकुछ इंस्टेंट चाहिए. 2 मिनट में मैगी बनने से शुरू हुआ ये सिलसिला अब रेडी टू इट फूड पर आ गया है. मार्केट में ऐसे ढेरो फूड प्रोडक्ट हैं, जो पाउडर फॉर्म में होते हैं. इन्हें आप खरीद कर घर लाइए, पैकेट खोलिए इसे गैस या ओवन पर 2 मिनट गर्म करें बस खाने के लिए ये तैयार है. बटन चिकन से लेकर रोटी तक… फ्रोजन फॉर्मेट में मिल रहे हैं.

हम अक्सर चिप्स, कुकीज, नमकीन, पैकेज्ड मोमोज या रोटी का पैकेट खरीदते हैं और खा लेते हैं. बहुत कम लोग पैकेट को पलटकर उसके पीछे देखते हैं कि जो फूड वो खा रहे हैं, वो उनके शरीर के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह. अगर आप पैकेट पर लिखे कुछ बातों को ध्यान से पढ़ें तो खुद को और परिवार को जानलेवा बीमारियों से बचा सकते हैं.

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फ्रंट‑ऑफ‑पैक लेबलिंग क्या है?
फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) वह लेबल है, जो किसी फूड प्रोडक्ट के पैकेट के आगे के हिस्से में लिखा रहता है. इसमें आसान भाषा में खाने के मेन इंग्रीडिएंट्स के बारे में बताया जाता है. ताकि, कंज्यूमर तुरंत समझ सके कि वो जो सामान खरीद रहा है, वह हेल्थ के लिए कितना सही है.

‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ क्यों जरूरी है?
‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ इसलिए जरूरी है ताकि लोग पैकेज्ड फूड खरीदते समय जल्दी और स्पष्ट रूप से उसके हेल्थ इम्पैक्ट को समझ सकें. ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ में हेल्दी और अनहेल्दी में फर्क करना भी बताता है.

न्यूट्रिशनल जानकारी कहां लिखी मिलेगी?
ये जानकारी आमतौर पर पैकेज्ड फूड के पीछे या किनारे पर एक टेबल के फॉर्म में लिखी होती है. यह जानकारी प्रोडक्ट के 100 ग्राम, 100 मिलीलीटर या हर सर्विंग में मौजूद न्यूट्रिशनल वैल्यू के बारे में भी इंडिकेट करती है.

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‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ पर SC ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से कहा है कि वह पैकेज्ड फूड पर ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ लागू करने पर गंभीरता से विचार करे, ताकि लोग खरीदते समय ही संभावित हेल्थ रिस्क समझ सकें. न्यूट्रिशनल वैल्यू पढ़कर लोग तय कर पाएंगे कि उनके लिए वो फूड कितना हेल्दी है. इससे अप्रत्यक्ष तौर पर मोटापा, डायबिटीज, हार्ट डिजीज जैसे गंभीर बीमारियों का रिस्क कम हो सकेगा.

पैकेज्ड फूड में होती हैं कौन सी खतरनाक चीजें?
पैकेज्ड फूड में शुगर, हाई सॉल्ट, ट्रांस फैट, रिफाइंड कार्ब, प्रिजर्वेटिव्स, सोडियम नाइट्रेट, हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप, आर्टिफिशियल फूड कलर और मोनो सोडियम ग्लूटामेट जैसे खतरनाक चीजें मिली होती हैं. इनके लगातार इस्तेमाल से आपके बॉडी पार्ट जैसे हार्ट, लंग्स और किडनी को नुकसान पहुंचता है.

भारत में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य महामारी
भारत में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य महामारी बन चुका है, जिससे वर्तमान में 35 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं. 2050 तक यह संख्या 45 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. यह मुख्य रूप से खराब लाइफ स्टाइल, प्रोसेस्ड फूड का हद से ज्यादा इस्तेमाल और फिजिकल एक्टिविटी में कमी के कारण है. पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में मोटापे की दर ज्यादा है.

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