नई दिल्लीः एक बार फिर पाकिस्तान के लिए उसका सबसे करीबी दोस्त चीन ढाल बनकर सामने खड़ा हुआ है. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ (एफएटीएफ) के अनुसार पाकिस्तान एक बार फिर अपनी कार्ययोजना को पूरा करने में विफल रहा है. इस कारण उसे काली सूची में डाला सकता था, लेकिन उसके करीबी दोस्त चीन, परंपरागत दोस्त तुर्की और मलेशिया ने उसे बचा लिया. एफएटीएफ के मुताबिक किसी देश को काली सूची में डालने से बचाने के लिए उसे तीन देशों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए. भारत लगातार पाकिस्तान को काली सूची में डालने के दबाव बना रहा है. उसकी कोशिश काफी हद तक सफल भी हुई है लेकिन चीन और कुछ अन्य देशों के पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा हो जाने की वजह से पड़ोसी देश को काली सूची में डलवाने की मुहिम फिलहाल विफल हो गई है. Also Read - कश्मीर में भारत 22 अक्टूबर को मनाएगा 'काला दिवस', 1947 में पाकिस्तान ने घाटी में कराई थी हिंसा

वैसे रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इससे तो पाकिस्तान की मौजूदा इमरान खान सरकार की परेशानी टल गई है लेकिन अभी संकट के बादल छंटे नहीं हैं. एफएटीएफ ने पाकिस्तान को अक्टूबर तक अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने या कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है जिसके तहत उसे काली सूची में डाला जा सकता है. Also Read - आतंकियों को पनाह देना अब पाकिस्तान को पड़ेगा भारी, ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्टेड भी हो सकता है

फ्लोरिडा के ओरलैंडो में अपनी पूर्ण बैठक के समापन पर जारी एक बयान में, एफएटीएफ ने चिंता व्यक्त की कि ‘‘न केवल पाकिस्तान जनवरी की समय सीमा के साथ अपनी कार्ययोजना को पूरा करने में विफल रहा, बल्कि वह मई 2019 तक भी अपनी कार्य योजना को पूरा करने में भी विफल रहा है.’’ एफएटीएफ ने ‘कड़ाई’ से पाकिस्तान से अक्टूबर 2019 तक अपनी कार्ययोजना को पूरा करने का अनुरोध किया. Also Read - पाकिस्तान ने आंतकियों को दी खुली छूट, हाफिज सईद से कहा- कश्मीर में भेजो दहशतगर्द

पाकिस्तान अक्टूबर 2018 से एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है. ऐसा पाकिस्तान के आतंकवाद को वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने के जोखिम को देखते हुए किया गया था. पाकिस्तान आतंकवाद को वित्तपोषण रोकने के लिए अभी तक अपने वित्तीय लेनदेन में अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड का पालन नहीं करता है.