
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि पर भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान की हालत पतली हो गई है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 में की गई इस जल संधि को स्थगित कर दिया था. संधि स्थगित होने के बाद से भारत ने सिंधु जल प्रणाली का डेटा पाकिस्तान के साथ साझा करना बंद कर दिया है. साथ ही चिनाब और झेलम नदियों पर कई हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के निर्माण में भी तेजी लाई है. देश पर मंडरा रहे पानी के संकट को देखते हुए पाकिस्तान बौखलाया हुआ है.
भारत के पर्यावरण मंत्रालय के तहत एक समिति ने जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चेनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के द्वितीय चरण को मंजूरी दे दी है. अब लगभग 3,200 करोड़ रुपये की लागत वाली इस रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना के लिए निर्माण निविदाएं जारी करने का रास्ता साफ हो गया है.
दुलहस्ती प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने की खबर सामने आते ही पाकिस्तान में हड़कंप मच गया. पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने इसे लेकर चिंता जताई है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा कि इस परियोजना के संबंध में पाकिस्तान के साथ कोई पूर्व सूचना साझा नहीं की गई है. अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान ये भी जानना चाहता है कि क्या यह एक नयी परियोजना है या किसी मौजूदा संयंत्र में कोई परिवर्तन या अतिरिक्त कार्य है. अंद्राबी ने कहा कि सिंधु जल संधि एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है. ताहिर हुसैन अंद्राबी के जवाब में पाकिस्तान की बेचैनी साफ दिखी.
दुलहस्ती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट एक ‘रन ऑफ द रिवर’ जल-विद्युत परियोजना है जिसमें नदियों के जल प्रवाह में बिना बाधा डाले जल-विद्युत का उत्पादन किया जाएगा. इसमें नदी के मार्ग में बिना बड़े बांध बनाए पानी से बिजली बनाने की योजना है. सिंधु जल संधि स्थगित करने से पहले चेनाब बेसिन का पानी 1960 की संधि के प्रावधानों के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच साझा किया जाता रहा है. दुलहस्ती परियोजना के मापदंड उसी संधि के अनुरूप तय किए गए थे.
जब सिंधु जल संधि लागू थी तब पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों पर अधिकार था जबकि भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर. अब संधि के स्थगित होने के बाद केंद्र सरकार सिंधु बेसिन में कई जलविद्युत परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है. इनमें सावलकोट, रातले, बरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू और कीर्थई जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं.
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