तिरूवनंतपुरम. सबरीमला मंदिर में रजस्वला उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश पर अपने रुख को कड़ा करते हुए तत्कालीन पंडलाम राज परिवार ने बुधवार को कहा कि वह अयप्पा मंदिर के प्राचीन अनुष्ठानों और परंपराओं पर किसी प्रकार के समझौते के लिए तैयार नहीं है. Also Read - श्रद्धालुओं के लिए खुला सबरीमला मंदिर, एक दिन में सिर्फ 250 लोगों को दर्शन की इजाजत- COVID निगेटिव सर्टिफिकेट जरूरी

पंडलाम राज परिवार के प्रतिनिधि शशिकुमार वर्मा ने केरल सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के मंदिर का संरक्षक है. उन्होंने कहा, यह ‘गलत’ है. उन्होंने कहा, ‘‘यह मंदिर श्रद्धालुओं का है.’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘यदि रीति रिवाजों और परंपराओं का उल्लंघन होता है तो उन्हें सवाल उठाने का अधिकार है.’’ Also Read - अगले हफ्ते से खुलेंगे तिरुमला मंदिर और सबरीमला मंदिर के पट, शर्तों के साथ मिलेगा प्रवेश

मंदिर बंद करने के लिए कभी नहीं कहा
उन्होंने कहा, ‘‘हमने मंदिर को बंद करने के लिए कभी नहीं कहा. हम रीति रिवाजों और परंपराओं पर किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं. मेरे परिवार कीउअयप्पा मंदिर के धन पर पर नजर नहीं है.’’मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसके जरिये ‘अवर्ण’ और ‘सवर्ण’ जाति में धार्मिक हिंदुओं को ‘विभाजित’ करने का प्रयास था. लेकिन अयप्पा के भक्तों ने यह सब देखा और इसके जाल में नहीं फंसे. Also Read - महिलाओं के साथ सबरीमला जा रही थीं तृप्ति देसाई, एयरपोर्ट से यहां ले गई पुलिस

इस दिन खोला गया मंदिर
उन्होंने कहा कि पिछले छह दिनों में जब 17 से 22 अक्टूबर के बीच मासिक पूजा के लिए मंदिर खोला गया तो सबरीमाला को लेकर जो कुछ हुआ वह बहुत ‘पीड़ादायक’ था. वर्मा ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था, शौचालय और पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने में सरकार नाकाम रही है. ऐसे में पुलिस सुरक्षा के बीच छह महिलाओं को पर्वत पर पैदल ले गयी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में कहा
उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के मुताबिक 10-50 आयु समूह की किसी भी असली महिला श्रद्धालु ने मंदिर में पूजा अर्चना की कोशिश नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि छह महिला जिन्होंने मंदिर में पूजा अर्चना का प्रयास किया था उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की गयी थी, यह एक गुप्त एजेंडे का हिस्सा था. उन्होंने केरल की माकपा की अगुवाई वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राज परिवार का मंदिर के साथ जुड़ाव हर पांच साल में नहीं बदलता है.