बेंगलुरु. गौरी लंकेश की हत्या के आरोपियों का खुलासा हो गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में आरोपी परशुराम वाघमारे ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन (SIT) के सामने कबूल किया है कि उसने गौरी लंकेश की हत्या की थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि एसआईटी के सामने वाघमारे ने कहा, ‘मुझे मई 2017 में कहा गया था कि अपने धर्म की रक्षा के लिए किसी को मारना है. मुझे पता नहीं था कि वह कौन हैं, लेकिन अब लगता है कि मुझे उन्हें मारना नहीं चाहिए.’

रिपोर्ट में वाघमारे के हवाल से कहा गया है, मुझे 3 सितंबर को बेंगलुरु लाया गया था. बेलागवी में एयरगन चलाने की ट्रेनिंग दी गई. बतका दें कि एसआईटी के अधिकारी ने दावा किया था कि परशुराम वाघमारे ने गौरी की हत्या को अंजाम दिया था. वाघमारे गौरी लंकेश की हत्या के संबंध में गिरफ्तार किए गए छह संदिग्धों में से एक है.

हथियार एक जैसे
एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी कहा कि गौरी और तर्कवादी एवं अंधविश्वास विरोधी गोविंद पंसारे तथा एम एम कलबुर्गी को गोली मारने के लिए एक ही हथियार का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि संगठित गिरोह ने अपने भूमिगत संगठन को कोई एक नाम नहीं दिया है. अधिकारी ने बताया कि हिंदू दक्षिणपंथी समूहों के लोगों को शामिल कर बनाए गए इस संगठन में 60 सदस्य हैं जो कम से कम पांच राज्यों में फैले हुए हैं लेकिन इस संगठन का कोई नाम नहीं है.

कई राज्यों में फैला है नेटवर्क
अधिकारी ने कहा, “हमें मालूम हुआ है कि इस गिरोह का मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में नेटवर्क है.’’ उन्होंने कहा कि भले ही इस गिरोह ने महाराष्ट्र के हिंदू जागृति समिति और सनातन संस्था जैसे कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी संगठनों के लोगों को भर्ती किया लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि ये संस्थाएं सीधे तौर पर हत्या में शामिल हों. दोनों ही संगठनों ने इन तीनों की हत्या में किसी तरह की भूमिका से इनकार किया है.

हथियार के बारे में जानकारी नहीं हुई
अधिकारी ने बताया कि सुजीत कुमार उर्फ प्रवीण गिरोह के लिए लोगों की भर्ती करता था और उसी से पूछताछ के दौरान इस नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ. उन्होंने कहा, “वाघमारे ने गौरी को गोली मारी और फॉरेंसिक जांच से पुष्टि होती है कि (तर्कवादी) गोविंद पंसारे, एम एम कलबुर्गी और गौरी की हत्या एक ही हथियार से की गई.” अधिकारी ने कहा कि हथियार का अभी पता नहीं लगाया जा सका है.