नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि संसद भवन तथा सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास की सरकार की मेगा योजना और विभिन्न मंत्रालयों के लिए एक समग्र परिसर का निर्माण कार्य अगले साल शुरू हो सकता है. उन्होंने यहां एक कार्यक्रम से इतर यह बात कही. मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर मंत्री की यह पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है. राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किमी के दायरे में मौजूद ‘सेंट्रल विस्टा (केन्द्रीय भूदृश्य)’ को पुनर्विकसित करने की मेगा योजना के तहत मोदी सरकार ने संसद भवन, एकीकृत केंद्रीय सचिवालय और सेंट्रल विस्टा के विकास या पुनर्विकास के लिए प्रस्ताव मांगा है.

संसद भवन के स्थान और डिजाइन के बारे में पूछे जाने पर पुरी ने कहा कि इन पहलुओं पर अभी विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मध्य अक्टूबर तक हम निविदा (डिजाइन के लिए) जारी कर सकेंगे और अगले साल तक निर्माण शुरू हो सकता है. इससे पहले अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना का जिक्र किया जिसके तहत रायसीना हिल से लेकर इंडिया गेट तक फैले सरकारी कॉम्प्लेक्स के पुनर्विकास की योजना है. इसमें नार्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक तथा संसद भवन परिसर शामिल हैं. पुरी ने कहा, ‘‘अगले चुनाव के समय यानी 2024 में जब हम मिलेंगे, उम्मीद है कि हम नए संसद भवन में होंगे.’’

इससे पहले बृहस्पतिवार को सरकारी सूत्रों ने कहा था कि 2022 में संसद का मानसून सत्र नव-विकसित संसद भवन में आयोजित किया जाएगा. सूत्रों ने कहा कि अगले साल तक सेंट्रल विस्टा का पुनर्विकास किया जाएगा और 2024 तक एकीकृत केंद्रीय सचिवालय का निर्माण किया जाएगा. यह पूछे जाने पर कि क्या पुराने संसद भवन को भी बदला जाएगा, पुरी ने कहा, ‘‘यह इमारत विरासत है, और इसलिए इसके अग्रभाग को बदला नहीं जा सकता.’’ पुरी ने कहा, ‘‘यह प्रधानमंत्री की स्वप्निल परियोजना है. इनमें से अधिकतर इमारतें 1911 से 1927 के बीच बनी हैं जो बहुत शानदार हैं, लेकिन आजादी के बाद बनी कुछ इमारतें जल्दी में बनाई गईं प्रतीत होती हैं और वे शायद अपना मकसद पूरा कर चुकी हैं.’’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा आजादी के बाद बनी कई इमारतें भूकंप रोधी नहीं हैं और इनकी मरम्मत में बहुत लागत लगती है.