
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है. सरकार ने 2023 में संसद के स्पेशल सेशन के दौरान महिला आरक्षण विधेयक पेश किया था. उसी दौरान इस बिल को आधिकारिक रूप से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा गया था. इस बिल के कानून बनने के बाद लोकसभा में सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी. महिला सांसदों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी 273 हो जाएगी. इस प्रस्ताव को मोदी कैबिनेट की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है. अब बिल में हुए संशोधनों पर चर्चा के लिए संसद का स्पेशल सेशन बुलाया गया है.
2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था. इसके तहत महिला आरक्षण नई जनगणना के बाद लागू होना है. अब इस बिल पर चर्चा के लिए संसद का सत्र 13 दिन के ब्रेक के बाद 16 अप्रैल से फिर शुरू होगा. 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े अहम बिल पर चर्चा की जाएगी. बता दें कि संसद के बजट सत्र का पहला फेज- 31 जनवरी से 13 फरवरी और दूसरा फेज 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक तय था. बाद में इसे बढ़ाया गया है.
इस बिल में क्या है?
प्रस्ताव के मुताबिक, 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. आरक्षण का ढांचा ऐसा होगा, जिसमें SC और ST वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा. OBC महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है. इसी फॉर्मूले पर राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना है, ताकि पूरे देश में एक जैसा ढांचा रहे.
2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार होगा परिसीमन
पहले इसे लागू करने के लिए नई जनगणना का इंतजार किया जा रहा था. अब सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार करने की बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए. इससे प्रोसेस तय समय पर पूरी हो सकेगी और आरक्षण लागू किया जा सकेगा.
LNG क्या होता है जिसकी हर तरफ है चर्चा? सप्लाई रुकी तो ठप पड़ जाएगा सबकुछ! देख लें लिस्ट
इस सत्र में लाए जाएंगे 2 बिल
संसद के इस स्पेशल सेशन में 2 बिल पेश होंगे. एक बिल के जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव से जुड़ा होगा. इसे पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा. इसी वजह से सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है.
किस राज्य में बढ़ेंगी सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें?
कब उठा था पहली बार महिला आरक्षण का मुद्दा?
1931 में पहली बार महिला आरक्षण का मुद्दा उठा था. तब भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिलाओं के लिए राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी. हालांकि, प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था. बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया था. 1971 में भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया. 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं. महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है.
लोकसभा में किस राज्य से कितने महिला सांसद?
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.