Parliament Monsoon Session 2021: नागरिकता संशोधन एक्ट यानी CAA के नियम अभी तक तैयार नहीं हुए हैं. केंद्र सरकार ने आज मंगलवार को संसद में इसकी जानकारी दी. सरकार ने नियम गढ़ने के लिए छह महीने अतिरिक्त मांगें हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में ये बात कही. इसने कहा कि सीएए के नियम गढ़ने के लिए 9 जनवरी, 2022 तक का समय मांगा है, ताकि नियमों को तैयार किया जा सके.Also Read - PM Modi’s 71st Birthday: 71 साल के हुए प्रधानमंत्री मोदी, राष्‍ट्रपति, अमित शाह ने दी बधाई, BJP का सेवा-समर्पण अभियान आज से

दरअसल लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने पूछा कि क्या सरकार ने सीएए नियमों को नोटिफाइ करने की कोई अंतिम तारीख तय की है. जवाब हां है तो वो तारीख कौन सी है, और नहीं तो अभी तक ऐसा क्यों नहीं हो सका है. Also Read - अगर BJP हमारे साथ चुनाव लड़े तो BSP के लिए बड़ा झटका हो सकता है: RPI नेता रामदास अठावले

इसके जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (MoS Home Nityanand Rai) ने कहा कि सीएए को 12.12.2019 को नोटिफाई किया गया था. साल 2020 में ये कानून का रूप ले चुका है. मगर लोकसभा और राज्यसभा की कमेटियों ने कानून के नियम तैयार करने के लिए जनवरी, 2022 तक समय मांगा है. Also Read - Gujarat New CM Bhupendra Patel: कौन हैं गुजरात के 17वें सीएम भूपेंद्रभाई रजनीकांतभाई पटेल, जानिए

मालूम हो कि हाल में नए कानून को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) से मुसलमान को किसी भी तरह कोई नुकसान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि सीएए और एनआरसी का हिंदू-मुस्लिम विभाजन से कोई लेना-देना नहीं है और इन मुद्दों के इर्द-गिर्द सांप्रदायिक लोगों के एक वर्ग द्वारा अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए फैलाया जा रहा है.

आरएसएस प्रमुख ने ‘एनआरसी और सीएए पर नागरिकता बहस: असम और इतिहास की राजनीति’ नामक एक पुस्तक को लॉन्च करने के बाद कहा, ‘1930 के बाद से मुस्लिम आबादी को आतंकवाद और अर्थव्यवस्था के संबंध में नहीं बल्कि एक प्रमुख ताकत बनने के लिए संगठित योजनाएं हैं. यह पंजाब, बंगाल और असम में हुआ. इन क्षेत्रों को अपने बहुमत में बदलने की योजना है ताकि चीजें अपनी शर्तों पर काम करें. यह पाकिस्तान और बांग्लादेश में हुआ. फिर भी हम आत्मसात करना चाहते हैं और एक साथ रहना चाहते हैं.’

भागवत ने कहा कि विभाजन के बाद हमने अपने अल्पसंख्यकों का ख्याल रखा है, भले ही पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया. एनआरसी केवल यह पता लगाने की एक प्रक्रिया है कि एक वास्तविक नागरिक कौन है और कुछ नहीं. मामला (एनआरसी) सरकार के अधिकार क्षेत्र में है. लोगों का एक वर्ग एनआरसी और सीएए दोनों को शामिल करके सांप्रदायिक आख्यान बनाकर राजनीतिक लाभ प्राप्त करना चाहता है. (एजेंसी इनपुट्स)