नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा के अच्छे दिन चल रहे हैं. तभी तो देश के सबसे बड़े इलेक्टोरल ट्रस्ट Prudent Electoral Trust ने बीते वित्त वर्ष 2017-18 में अपने 169 करोड़ रुपये के फंड में से 144 करोड़ रुपये उसे दे दिए. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक इस ट्रस्ट में सहयोग देने वाली सबसे बड़ी कंपनी DLF है. उसने इसमें 52 करोड़ रुपये का सहयोग दिया. इसके बाद भारती ग्रुप ने 33 करोड़ रुपये, श्रॉफ समूह के UPL ने 22 करोड़ और गुजरात के टोरेंट ग्रुप ने 20 करोड़ रुपये का योगदान दिया था. डीसीएम श्रीराम ने 13 करोड़, कैंडिला ग्रूप ने 10 करोड़ और हल्दिया एनर्जी ने 8 करोड़ रुपये की सहायता दी थी. इस ट्रस्ट को पहले सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट के नाम से जाना जाता था.

इस ट्रस्ट ने पैसे के संकट से जूझ रही कांग्रेस को केवल 10 करोड़ और ओडिशा के बीजू जनता दल को 5 करोड़ रुपये का चंदा दिया. पूर्व में Prudent आधे दर्जन से अधिक राजनीतिक दलों को दान देता रहा है. इसमें शिरोमणि अकाली दल, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल जैसी पार्टियां शामिल हैं.

मध्य प्रदेश चुनावः कांग्रेस के लिए राह नहीं है आसान, BJP की इस रणनीति का नहीं है कोई काट!

पिछले करीब चार साल से कॉरपोरेट क्षेत्र की 90 फीसदी कंपनियां इसी ट्रस्ट को दान देती आ रही हैं. अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच इस ट्रस्ट ने भाजपा को 18 इंस्टॉमेंट में 144 रुपये का चंदा दिया. इस ट्रस्ट ने 2014 में अपने कुल 85.4 करोड़ रुपये में से 41.37 करोड़, 2015 में 141 करोड़ में से 106 करोड़, 2016 में 47 करोड़ की कुल राशि में से 45 करोड़ और 2017 में 283.73 करोड़ रुपये की कुल राशि में से 252.22 करोड़ रुपये (88.9 फीसदी) भाजपा को दिए.

RBI वाया सरकारः 1956-57 में भी हुआ था ऐसा ही विवाद, नेहरू ने गवर्नर से मांगा था इस्तीफा

देश में 22 रजिस्टर्ड इलेक्टोरल ट्रस्ट
देश में मौजूदा समय में 22 रजिस्टर्ड इलेक्टोरल ट्रस्ट हैं. हालांकि सभी का फंडिग पैटर्न करीब-करीब समान है. Prudent Electoral सबसे बड़ा ट्रस्ट है. इसके बाद आदित्य बिड़ला ग्रुप का AB General Electoral Trust है. वर्ष 2017 में इसने 21 करोड़ रुपये का चंदा दिया जिसमें से 12.5 करोड़ भाजपा को मिले. कांग्रेस को केवल एक करोड़ रुपये का चंदा मिला. इस ट्रस्ट ने बीते साल BJD को आठ करोड़ रुपये दिए. इसके अलावे जो ट्रस्स हैं उनमें से अधिकतर बहुत छोटे और कुछ ने काम करना बंद कर दिया है. आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2017 के बीच 9 रजिस्टर्ड इलेक्टोरल ट्रस्टो ने राजनीतिक दलों को 637.54 करोड़ का चंदा दिया.