नई दिल्ली: विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली में गत कुछ दिनों में कोविड-19 से होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि की वजह राष्ट्रीय राजधानी के बाहर से गंभीर हालत में मरीजों को लाना और गृह पृथकवास से मरीज को अस्पताल में स्थानांतरित करने के दौरान जाया होने वाला समय है. दिल्ली के प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टर जहां पर कोविड-19 मरीजों का इलाज चल रहा है, ने रविवार को कहा कि अब अधिकतर उन मरीजों की मौत हो रही है जिनकी उम्र 60 साल से अधिक है और वे अन्य गंभीर बीमारियों (सह-रुगण्ता) से ग्रस्त हैं. Also Read - Covid-19 महामारी की वजह से देश का लक्जरी कार बाजार 5-7 साल पीछे चला गया : ऑडी

उल्लेखनीय है कि शनिवार को दिल्ली में 46 लोगों की संक्रमण की वजह से मौत दर्ज की गई जो गत 70 दिनों में सबसे अधिक है. इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी में महामारी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 5,193 हो गई है. इससे पहले 16 जुलाई को दिल्ली में कोविड-19 से 58 लोगों की मौत दर्ज की गई थी. वहीं, संक्रमण के 3,372 नये मामले आने के साथ कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,67,822 हो गई है. Also Read - India Covid-19 Updates: देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 78 लाख के पार, बीते तीन महीनों में आज सबसे कम मौतें

राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ.बीएल शेरवाल ने कहा कि रोजाना सामने आने वाले संक्रमितों की संख्या में कमी बहुत स्वस्थ परिपाटी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि महामारी के शुरू होने के बाद से कोरोना वायरस के व्यवहार के बारे में बहुत अधिक अध्ययन हुआ है. उन्होंने कहा, ‘‘गत कुछ दिनों में रोजाना होने वाली मौतों की संख्या 30 से अधिक है या कल यह 46 थी. यह दो प्रमुख कारणों से है- पहला जिन मरीजों की मौत हुई, उनकी उम्र 60,70,80 और 90 साल थी और दूसरा अधिकतर सह रुगण्ता के शिकार थे.’’ Also Read - पीएम कहते थे कि जो हवाई चप्पल पहनते हैं वे हवाई जहाज में चलेंगे, लेकिन कोरोना संकट के समय कहां चले गए थे: सोरेन

राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए समर्पित है और शनिवार को यहां पर चार मरीजों की मौत हुई. शेरवाल से जब पूछा गया कि दिल्ली में संक्रमण के रोजाना सामने आने वाले मामलों में कमी के बावजूद मौतें क्यों बढ़ रही हैं, तब उन्होंने कहा, ‘‘बड़ी संख्या में मरीज दिल्ली के आसपास के शहरों और राज्यों से आ रहे हैं और उन्हें बहुत ही गंभीर हालत में लाया जाता है, इसलिए उनके बचने की दर बहुत कम होती है.’’

शेरवाल ने कहा कि उनके अस्पताल में पहले रोजाना एक या दो मरीजों की मौत होती थी लेकिन शनिवार को चार मरीजों की मौत हुई, जो तुलनात्मक रूप से बड़ी संख्या है. यहां स्थित अपोलो अस्पताल में इंटरनल मेडिसीन के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.सुरनजीत चटर्जी ने भी शेरवाल के रुख का समर्थन् करते हुए कहा कि दिल्ली के बाहर हरियाणा, मध्य प्रदेश और अन्य स्थानों से मरीज बहुत ही गंभीर हालत में यहां इलाज के लिए लाए जा रहे हैं. उन्होंने साथ ही कहा कि दिल्ली के मरीज भी गंभीर हालत में अस्पताल में लाए जा रहे हैं.

डॉ.चटर्जी ने कहा, ‘‘ अगर वे पहले ही गंभीर हालत में हैं और इतनी लंबी यात्रा करके आते हैं तो डॉक्टरों की बेहतरीन कोशिश और मानक इलाज के बावजूद उनमें से कई मरीजों की मौत हो जाती है, खासतौर पर उन मरीजों की जो अन्य गंभीर बीमारियों से गस्त हैं और अचानक उनकी हालत बिगड़ जाती है.’’

चटर्जी का मानना है कि बुजुर्ग मरीजों को गृह पृथकवास से अस्पताल में स्थानांतरित करने के दौरान बर्बाद होने वाला समय भी कई मरीजों की मौत की वजह हो सकता है. दिल्ली एम्स में हृदयवाहिका रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. अमरिंदर सिंह मल्ही से जब दैनिक मामलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी यह बताना जल्दबाजी होगी कि संक्रमण का चरम दौर गुजर गया है. उन्होंने कहा कि मामले कुछ स्थिर या कम हो सकते हैं लेकिन अभी इसमें पर्याप्त कमी नहीं आई है. लोगों को आने वाले महीनों में जिम्मेदारी से व्यवहार करने और आपात स्थति में ही घर से बाहर निकलने की जरूरत है.

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के गिरिधर बाबू ने कहा कि हमेशा मौत की रिपोर्टिंग में समय का अंतर होता है. उन्होंने कहा, ‘‘आमतौर पर मामलों के बढ़ने के 14 से 17 दिनों के बाद अधिक संख्या में मौतें दर्ज होती हैं. दिल्ली में संक्रमितों की संख्या में वृद्धि दो हफ्ते पहले शुरू हुई थी और इसलिए अस्पताल जाने के बाद उत्पन्न जटिलताओं को अब हम देख रहे हैं. अगर संक्रमितों की संख्या में वृद्धि जारी रही तो हमें मौतों को भी देखना पड़ेगा.’’