नई दिल्लीः जम्मू-कश्मीर में सियासी समीकरण एक बार फिर बदलते दिख रहे हैं. कश्मीर पर कथित विवादित टिप्पणी देने वाले राज्य के वित्तमंत्री हसीब द्राबू को पीडीपी सरकार ने कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया है. पेशे से बैंकर और अर्थशास्त्री द्राबू ने बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि उनकी बर्खास्तगी के बाद साल 2019 में होने वाले चुनाव में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन पर इसका कैसा असर पड़ेगा. बताया जाता है कि सीएम महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती सईद ने 1 जनवरी 2015 को अपनी गुलमर्ग यात्रा के दौरान हसीब द्राबू से बीजेपी से गठबंधन पर बात करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. इसके बाद द्राबू के प्रयासों से ही बीजेपी और पीडीपी में गठबंधन हुआ था. ऐसे में उनके जाने के बाद गठबंधन के रुख पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
द्राबू ने दिया था ये बयान
द्राबू ने एक कार्यक्रम में कश्मीर के लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि कश्मीर का मुद्दा राजनीतिक न होकर सामाजिक है. कश्मीर को संघर्षग्रस्त प्रदेश या राजनीतिक समस्या के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दों वाले समाज के रूप में देखा जाना चाहिए. इसके लिए लोगों को राज्य की स्थिति और प्रवृति के बारे में आत्मचिंतन करते हुए इसके हल के लिए प्रयास करना चाहिए. एक-दूसरे से बातचीत से पहले हमें अपने आप से बात करने की जरूरत है और यह सिर्फ राज्य में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर होना चाहिए.
विपक्ष ने घेरा
नेशनल कांफ्रेंस और सीपीआई (एम) ने द्राबू के बयान की कड़ी निंदा की है. उन्होंने राज्य सरकार को घेरने की कोशिश की. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राज्य में शांति नहीं चाहती है और उसकी मंशा साफ दिख रही है. हुर्रियत नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है.
सरकार ने किया बर्खास्त
पीडीपी उपाध्यक्ष सरताज मदनी ने कहा कि पीडीपी मानती है कि जम्मू-कश्मीर राजनीतिक मुद्दा है और केवल बातचीत से ही इसका समाधान निकाला जा सकता है. इसके बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया.