Pegasus Case: पेगासस जासूसी मामले (Pegasus Case) में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को करारा झटका दिया है और कहा है कि इपेगासस जासूसी मामले की जांच एक्सपर्ट कमेटी करेगी. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इस मुद्दे में केंद्र सरकार के द्वारा कोई विशेष खंडन नहीं किया गया है, इस प्रकार हमारे पास याचिकाकर्ता की दलीलों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है और हम एक विशेषज्ञ समिति नियुक्त करते हैं जिसका कार्य सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देखा जाएगा.Also Read - UP News: अब AK-203 असॉल्ट से दुश्मनों के दांत खट्टे करेगा भारत, अमेठी में बनेंगे 500000 से अधिक राइफल

सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पेगासस जासूसी मामले में भारतीयों की निगरानी और जासूसी करने में विदेशी एजेंसी की संलिप्तता होना गंभीर चिंता का विषय है. झूठ की जांच और सच्चाई की खोज के लिए एक समिति का गठन किया गया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि निजता के अधिकार के उल्लंघन की जांच होनी चाहिए. Also Read - Supreme Court On DMRC: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की DMRC की समीक्षा याचिका, रिलायंस इंफ्रा की याचिका पर 6 दिसंबर को होगी सुनवाई

आज कोर्ट की इस मामले में सुनवाई में चीफ जस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने इसपर फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि लोगों की विवेकहीन जासूसी बिल्कुल मंजूर नहीं. Also Read - Delhi Pollution: दिल्ली में प्रदूषण के बीच खुले स्कूल, सुप्रीम कोर्ट ने AAP सरकार से किया सवाल

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गठित की गई तीन सदस्यीय समिति के सदस्यों को आरोपों की पूरी तरह से जांच करने और अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश करने को कहा है. 8 सप्ताह के बाद इस केस में फिर सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरवी रवींद्रन करेंगे, वहीं अन्य सदस्य आलोक जोशी और संदीप ओबेरॉय भी इस समिति के सदस्य होंगे जो जांच का हिस्सा होंगे.