नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को आखिरी विदाई देने के लिए देश के कोने-कोने से बहुत से लोग दिल्ली पहुंचे. एक युवक उत्तर प्रदेश से स्कूटर पर आया, एक अन्य तमिलनाडु से विमान से आया. वहीं, कुछ लोग ट्रेनों और बसों से आएं. गौरतलब है कि वाजपेयी (93) का लंबी बीमारी के बाद कल एम्स में निधन हो गया और आज यहां उनकी अंत्येष्टि की गई.

उत्तर प्रदेश के बागपत से करीब 70 किमी की दूरी स्कूटर से तय कर आकाश कुमार (25) यहां पहुंचे. उन्होंने बताया कि वाजपेयी का काल के कपाल पे लिखता और मिटाता हूं, मेरी पसंदीदा कविता है. कुमार ने बताया कि शायद में तीसरी या चौथी कक्षा में था जब मैंने उनका एक भाषण सुना था और उनकी ओर खींचा चला गया. मैं उनकी कविताओं को पसंद करता हूं.

चिन्नैया नादेसन (45) अपने मित्र गणेशन (38) के साथ आज सुबह चेन्नई से विमान से दिल्ली पहुंचे. यहां पहुंचने पर वे सीधे 6 ए कृष्ण मेनन मार्ग (वाजपेयी के आवास) गए, जहां उनका पार्थिव शरीर लोगों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए रखा गया था.

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नादेसन ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद हिंदी और अंग्रेजी के मिलेजुले शब्दों में कहा, अच्छा नेता, अच्छा सांसद, विशुद्ध व्यक्ति. चिलचिलाती धूप के बावजूद हजारों की संख्या में लोग भाजपा मुख्यालय से सात किमी की दूरी तय कर राष्ट्रीय स्मृति स्थल तक गए जहां पूर्व प्रधानमंत्री की अंत्येष्टि की गई. रास्ते में कुछ लोगों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प बरसाये.

भाजपा मुख्यालय के बाहर खड़े आकाश कुमार ने कहा कि वह काफी देर तक वाजपेयी के अंतिम दर्शन का इंतजार करते रहे. साथ लाए पुष्प भी गर्मी के चलते सूख गए. अपनी पत्नी के साथ आए आकाश ने कहा कि वे वाजपेयी के लिए गंगोत्री से लाया पवित्र गंगा जल भी लेकर आए हैं.

लोगों के एक समूह के साथ उत्तराखंड के उत्तरकाशी से आए योगेश कुमार (52) ने कहा कि वह 1984 में वाजपेयी से मिले थे जब वह गंगोत्री जाने के लिए उत्तरकाशी से गुजर रहे थे. वह 1986 में भी उनके शहर में गए थे. उन्होंने वाजपेयी के साथ अपनी एक तस्वीर भी दिखाई.

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मध्य दिल्ली के पटेल नगर से अपने ऑटो रिक्शा से 32 वर्षीय सोनू गुप्ता कृष्ण मेनन मार्ग पहुंचे. गुप्ता ने बताया, मैं अपने ऑटो में आया लेकिन इसे ट्रैफिक जाम के चलते केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर लगाना पड़ गया. मैंने सोचा कि मुझे वहां पहुंचने के लिए डेढ़ किमी पैदल चलना चाहिए.

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी और दिल्ली के मुखर्जी नगर में रह कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयार कर रहे 23 वर्षीय शिवशक्ति सिंह को घंटों तक कतार में इंतजार करना पड़ा. उसने कहा, प्रधानमंत्री के रूप में उनकी शख्सियत से मैं प्रभावित हूं.

अपने दोस्त चंद्र शेखर मालवीय (36) के साथ मध्य प्रदेश के देवास से आए उमेश श्रीवास्तव (47) ने कहा, जब मैं किशोर था तभी से अटल जी भाषणों का मुरीद हूं. दोनों लोगों ने बताया कि वे जिला स्तर पर पार्टी से संबद्ध हैं. वहीं, बिहार से आए 20 वर्षीय एक व्यक्ति ने कहा, मुझे लगता है कि हमने एक महान नेता को खो दिया.