नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बाबरी विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत के फैसले पर बुधवार को सवाल उठाए और केंद्रीय जांच एजेंसी से इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अनुरोध किया है. वहीं, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कहा कि कानूनी विभाग से विमर्श के बाद फैसले को चुनौती देने के बारे में कोई निर्णय किया जाएगा. Also Read - रिया चक्रवर्ती की शिकायत पर सुशांत की बहनों पर FIR, सीबीआई ने मुंबई पुलिस को फटकारा

पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव वली रहमानी ने एक बयान में दावा किया, ”यह फैसला न्याय से कोसों दूर है.यह न तो सबूत और न ही कानून पर आधारित है. उन्होंने कहा, ”आरोपियों को बरी करने का जो भी कारण हो, लेकिन हम सबने विध्वंस के वीडियो एवं तस्वीरें देखी हैं. इस साजिश में कौन लोग शामिल थे, ये सबको पता है.” रहमानी ने कहा, ”हम आग्रह करते हैं कि कानून के शासन को बरकरार रखने के लिए सीबीआई (फैसले के खिलाफ) अपील करे.” Also Read - HC ने रिश्वतखोरी के आरोपों की CBI जांच के आदेश दिए थे, CM त्रिवेंद्र सिंह रावत पहुंचे शीर्ष कोर्ट

वहीं, फैसले के बाद सीबीआई के वकील ललित सिंह ने कहा, ”आज के निर्णय की कॉपी मिलने के बाद इसे सीबीआई मुख्यालय भेजा जाएगा, जहां कानूनी विभाग इसका अध्ययन करेगा और फिर इसके सुझाव के अनुरूप अपील दायर करने पर कोई निर्णय किया जाएगा.” Also Read - हाथरस कांड पर SC का फैसला-अभी केस ट्रायल यूपी में ही होगा, तुरंत ट्रांसफर की जरूरत नहीं

कई दूसरे मुस्लिम संगठनों ने भी अदालत के फैसले को लेकर सवाल किए. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बाबरी विध्वंस मामले में विशेष अदालत के फैसले को लेकर सवाल खड़े करते हुए बुधवार को दावा किया कि यह फैसला पिछले साल अयोध्या मामले में आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ है.

जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने एक बयान में कहा, ”सवाल यह है कि जब बाबरी मस्जिद तोड़ी गई तो फिर सीबीआई की नज़र में सब निर्दोष कैसे हो गए? क्या यह न्याय है?” उन्होंने दावा किया कि यह फैसला पिछले साल अयोध्या मामले में आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ है.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव महमूद मदनी ने दावा किया, ‘‘यह फैसला अत्यधिक दुखद और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है. यह एक ऐसा फैसला है जिसमें न इंसाफ किया गया है और न इसमें कहीं इंसाफ दिखता है. इसने न्यायालय की आज़ादी पर वर्तमान में लगाए गए प्रश्नवाचक चिन्ह को और गहरा कर दिया है.’’

जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख सैयद सदातुल्ला हुसैनी ने कहा, ”लोग 28 साल से इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन इंसाफ नहीं हुआ. उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि विध्वंस एक आपराधिक कृत्य था. ऐसे में विशेष अदालत का फैसला समझ से परे है.”

बता दें कि सीबीआई की विशेष अदालत ने छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में बुधवार को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया.

विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एस के यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, यह एक आकस्मिक घटना थी. उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी.