नई दिल्ली: विवाद और लेटलतीफी के बाद उत्तर प्रदेश के 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भले ही बंगला खाली कर दिया हो, लेकिन उनकी मुश्किलें शायद अभी कम नहीं हुई हैं. सुप्रीम कोर्ट में अब इस बात को लेकर याचिका दायर की गई है कि समय से बंगला खाली नहीं करने पर कोर्ट के आदेश की अवमानना क्यों की गई. इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि बंगला खाली करने में देरी करने वाले मुख्यमंत्रियों से उस अवधि का किराया वसूला जाए. ये किराया मार्केट रेट के हिसाब से वसूला जाए.Also Read - अखिलेश यादव से मिले उमर खालिद के पिता, योगी आदित्यनाथ बोले- अगर ये लोग आएंगे तो क्या करेंगे

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लोकप्रहरी संस्था ने दायर की याचिका

ये याचिका लोकप्रहरी नाम की संस्था ने दायर की है. इसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ इस आधार पर कार्रवाई की मांग की गई है कि न्यायलय की अवमानना आखिर क्यों की गई. सुप्रीम कोर्ट अगर इस याचिका पर सुनवाई करता है तो 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त, 2016 को ही यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले 30 सितंबर, 2016 तक खाली करने के आदेश दिए गए थे.

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सपा सरकार ने आवंटित कर दिए थे बंगले

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद चार जनवरी 2017 को सपा सरकार नया कानून ले आई. नए कानून में ये निर्धारित किया गया कि सभी 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले आवंटित हो गए. नए कानून के नियम के अनुसार आवंटन के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले खाली नहीं करने पड़ेंगे. 8 मई, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने ही इस कानून को भी रद्द कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले खाली करने के आदेश दिए.

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तोड़फोड़ मामले में अखिलेश के खिलाफ दायर हुई थी याचिका

इस पर जमकर विवाद हुआ. 23 जून, 2018 को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा सरकारी बंगले को खाली करने से पहले उसमें तोड़फोड़ करने को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में सरकारी बंगले में हुए नुकसान की जांच और दोषी से उसकी भरपाई कराने की मांग की गई थी. योगी सरकार ने तोड़फोड़ मामले की जांच के लिए पांच सदस्‍यीय कमेटी गठित की थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

बता दें कि 15 जून, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के आधा दर्जन पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने सरकारी बंगले 15 दिन में खाली करने के आदेश दिए थे. शीर्ष अदालत ने कहा था कि 1997 के जिस नियम के तहत उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला दिया गया है, उसका कोई कानूनी आधार नहीं है. उन्हें जिंदगी भर के लिए सुविधाएं नहीं दी जा सकती हैं. इस आदेश के बाद अखिलेश यादव सहित कई मुख्यमंत्रियों ने दो साल का समय मांगा था, उनकी मांग को खारिज कर दी गई थी. इससे पहले राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह ने बंगला खाली कर दिया था. मायावती ने भी बंगले को खाली करने से पहले यहां बोर्ड लगा दिया था. खराब सेहत के चलते एनडी तिवारी ने बंगला मोहलत के कुछ दिन बाद खाली किया था.