नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार किये जाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी. याचिका को त्वरित सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी और न्यायमूर्ति ए जे भंभानी की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया. Also Read - UP पुलिस ने पूर्व एमपी धनंजय सिंह की तलाश में लखनऊ से दिल्ली तक छापे मारे

इस पर अदालत ने कहा कि वह बुधवार को याचिका पर सुनवाई करेगी. मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर और कार्यकर्ता फराह नकवी की ओर से दाखिल याचिका में घटना की जांच के लिए एसआईटी का गठन किये जाने और हिंसा में हताहत लोगों को मुआवजा दिये जाने की मांग की गई है. Also Read - BJP MP नंद कुमार सिंह चौहान का COVID-19 के संक्रमण के चलते मेदांता अस्‍पताल में निधन

अधिवक्ता स्नेहा मुखर्जी ने याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मांग है कि उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जो लोगों को भड़का रहे हैं और नफरत भरे भाषण दे रहे हैं जिससे उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा फैली हुई है. Also Read - Delhi: बहन के पीछे पड़े मनचलों की हरकत का विरोध करने पर भाई को चाकुओं से गोदा, लड़की ने बयां की दास्‍तां

याचिका में राष्ट्रीय राजधानी और ऐसे क्षेत्र में जहां ‘‘लोगों पर सांप्रदायिक हमले अधिक हो रहे हैं,’’ कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए केन्द्र को सेना की तैनाती करने के निर्देश दिये जाने का अनुरोध भी किया गया है.

उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद और मौजपुर में सीएए के समर्थक और विरोधी समूहों के बीच झड़पें हुईं. प्रदर्शनकारियों ने कई मकानों , दुकानों और गाड़ियों में आग लगा दी और पथराव किया. शहर के चांदबाग और भजनपुरा इलाके में भी हिंसा की घटनाऐं हुई हैं. संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर सोमवार से भड़की हिंसा में दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल सहित नौ लोगों की मौत हो गयी और कई अन्य घायल हुए हैं.

वकील फजल अब्दाली और नबीला हसन के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया है कि 22 फरवरी को करीब 500 लोग जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पहुंचे, जहां पर महिलाएं सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थीं. इसमें आरोप लगाया गया कि 23 फरवरी को भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास सीएए के समर्थन में रैली निकाली और भड़काऊ, आपत्तिजनक बयान दिए और इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक ट्वीट भी पोस्ट किया.

याचिका में मिश्रा, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा तथा अन्य के खिलाफ अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है.

(इनपुट भाषा)