नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल की कीमतों का लगातार बढ़ना जारी है. गुरुवार को भी इनके दामों में क्रमश: 15 पैसे और 20 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से चिंतित सरकार इसके अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर को रोकने के विकल्पों पर विचार कर रही है. सूत्रों ने जानकारी दी की कि इस संबंध में बुधवार शाम को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मुलाकात की.

सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों ने गुरुवार को जारी अधिसूचना में बताया कि पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 15 पैसे और 20 पैसे प्रति लीटर बढ़ाये गए हैं. इस वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल अब 84 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 75.45 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है. यह दोनों का सर्वकालिक उच्च स्तर है. ईंधन के बढ़ते दाम से किसानों की पहले से बदहाल स्थिति और खराब होने की आशंका है. विशेषकर रबी फसलों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ने का अनुमान है. डीजल अभी रिकॉर्ड उच्च कीमत पर बेचा जा रहा है. यह कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाता है.

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घरेलू रसोई गैस सिलेंडर 500 रुपये प्रति सिलिंडर के पार
खेत जोतने के लिए ट्रैक्टर से लेकर सिंचाई के पंपसेट तक डीजल से ही चलते हैं. अत: डीजल के महंगा होने से किसानों पर इसका असर पड़ना अवश्यंभावी है. ऐसा माना जा रहा है कि दोनों मंत्रियों ने कच्चा तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों तथा रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरते जाने के प्रभावों को दूर करने पर चर्चा की. साथ ही सब्सिडी वाला घरेलू रसोई गैस सिलेंडर भी पहली बार 500 रुपये प्रति सिलिंडर को पार कर गया है.  (इनपुट एजेंसी)