ट्रकों से नहीं ढोने पड़ेंगे गैस सिलेंडर, 2500 किलोमीटर लंबी LPG पाइपलाइन बिछाने की तैयारी में सरकार, जानिए क्या है योजना

Written By: Shivendra Rai Updated by: Shivendra Rai
Updated Date:April 17, 2026 2:57 PM IST

PNGRB के अनुसार, सड़क मार्ग से LPG ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी पिछली दुर्घटनाओं को देखते हुए पाइपलाइन से जोखिम कम होंगे. इससे सुरक्षित और भरोसेमंद डिलीवरी सुनिश्चित होगी.

Liquified petroleum gas pipeline: भारत में खाना पकाने के लिए घरों में इस्तेमाल की जाने वाली लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) को सिलेंडरों में भरकर देश के कोने-कोने में पहुंचाना पड़ता है. ये प्रक्रिया बेहद खर्चीली, थकाऊ और समय लेने वाली है. इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए सरकार एक खास तैयारी कर रही है.

Advertising
Advertising

ईंधन की बड़ी मात्रा में ढुलाई को खत्म करने के लिए लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस संबंध में, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) 2,500 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश वाली चार पाइपलाइनों के लिए बोली प्रस्तावों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है.

बोर्ड द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन प्रस्तावित पाइपलाइनों की कुल लंबाई लगभग 2500 किलोमीटर है. इन चार पाइपलाइनों में चेरलापल्ली – नागपुर पाइपलाइन, शिकरापुर – हुबली – गोवा पाइपलाइन, पारादीप – रायपुर पाइपलाइन और झांसी – सितारगंज पाइपलाइन शामिल हैं. इस पहल के तहत, विकास के लिए 9 LPG पाइपलाइन परियोजनाओं की पहचान की गई थी.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने LPG पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बोली प्रक्रिया को एक महत्वपूर्ण तरीके से शुरू किया है, ताकि बड़ी मात्रा में होने वाली ढुलाई को जहाँ तक संभव हो, खत्म किया जा सके. PNGRB ने कहा है कि ये पाइपलाइनें जरूरत के समय भंडारण के रूप में भी काम करेंगी और देश में आपूर्ति सुरक्षा संकट को दूर करने में मदद करेंगी.

प्रस्तावित पाइपलाइनों को प्रमुख आपूर्ति स्रोतों, जिनमें रिफाइनरियां और आयात टर्मिनल शामिल हैं, को LPG बॉटलिंग संयंत्रों से जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है. इससे कई क्षेत्रों में LPG की निर्बाध निकासी और वितरण सुनिश्चित हो सकेगी.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने कहा है कि यह कदम भारत के एनर्जी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल है. इससे पूरे देश में LPG ट्रांसपोर्टेशन की विश्वसनीयता, सुरक्षा, कुशलता और पर्यावरण स्थिरता बढ़ेगी.

PNGRB के अनुसार, सड़क मार्ग से LPG ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी पिछली दुर्घटनाओं को देखते हुए पाइपलाइन से जोखिम कम होंगे. इससे सुरक्षित और भरोसेमंद डिलीवरी सुनिश्चित होगी. बोर्ड ने इस बात पर जोर दिया कि खाना पकाने और कमर्शियल इस्तेमाल में भारत की LPG खपत को बहुत अहम माना जाता है. इसलिए बंदरगाहों और रिफाइनरियों को बॉटलिंग प्लांट से कुशलता से जोड़ने की जरूरत है. पाइपलाइनें इसके ट्रांसपोर्टेशन का पसंदीदा तरीका हैं, फिर भी एक बड़ी मात्रा अभी भी बल्क टैंकरों द्वारा ही ले जाई जाती है. अब ये प्रक्रिया धीरे-धीरे समाप्त करने की तैयारी है.

Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें