नई दिल्ली। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाया है. साथ ही रिजवी ने कहा कि कुछ मौलवियों ने अपनी हवस और अय्याशी के लिए हलाला बनाया. मीडिया के लिए जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि औरतों के ऐसे शोषण की इस्लाम में इजाजत नहीं है, हलाला पर सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले.

वसीम रिजवी ने कहा कि शरीयत के ठेकेदार ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की एक और कमी सामने आ रही है. सुप्रीम कोर्ट में निकाह-हलाला पर दाखिल की गई एसएलपी एआईएमपीएलबी का अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाने का नतीजा है. मुस्लिम समाज में फैली हलाला जैसी गंदगी के कारण तलाकशुदा महिलाओं का शारीरिक शोषण हो रहा है. हलाला प्रथा कुरान में इसलिए लिखी गई है कि लोग जल्दी तलाक न दें.

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रिजवी ने कहा, हलाला का मतलब ये है कि जब मुस्लिम व्यक्ति अपनी पत्नी को तीसरी बार जायज तरीके से तलाक देता है तो पत्नी उस व्यक्ति पर हराम हो जाती है. उस तलाकशुदा महिला से वह तब तक दोबारा शादी नहीं कर सकता जब तक कि महिला का दूसरा निकाह ना हो जाए और उससे तलाक ना हो जाए. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि पूर्व पति ही महिला की दोबारा शादी करवाए और दूसरे मर्द से उसका शारीरिक संबंध बनवाए.

उन्होंने कहा, दुर्भाग्य की बात है कि ज्यादातर मुल्लाओं ने हलाला को अपनी अय्याशी का वैध तरीका बना लिया है. यह वास्तव में महिलाओं के साथ अन्याय और शोषण है और अपराध की श्रेणी में आता है. निकाह की इस प्रक्रिया को इस्लामिक प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट को महिलाओं के इस तरह के शोषण पर संज्ञान लेना चाहिए.