नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को एक ऐसी जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें केंद्र को जनसंख्या नियंत्रण के लिए कदम उठाने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई है. भाजपा नेता एवं वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने इस आधार पर याचिका दायर की है कि देश में अपराध, प्रदूषण बढ़ने और संसाधनों एवं नौकरियों की कमी का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है.

याचिका में जनसंख्या नियंत्रण के लिए न्यायमूर्ति वेंकटचलैया की अगुवाई में राष्ट्रीय संविधान समीक्षा आयोग (एनसीआरडब्ल्यूसी) की सिफारिशें लागू करने का भी अनुरोध किया गया. याचिका में कहा गया, ”एनसीआरडब्ल्यूसी ने दो साल तक काफी प्रयास और व्यापक चर्चा के बाद संविधान में अनुच्छेद 47ए शामिल करने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था.”

रामदेव ने बताया आबादी कंट्रोल का तरीका, तो ओवैसी बोले- क्‍या मोदी खो देंगे मताधिकार?

बता दें कि आबादी नियंत्रण को लेकर दो दिन पहले रविवार को योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा था कि दो बच्‍चों के बाद पैदा होने वाले बच्‍चे को मताधिकार, चुनाव लड़ने के अधिकार और अन्‍य सरकारी सुविधाओं से वंचित कर दिया जाना चाहिए. रामदेव के इस बयान के बाद एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को उन पर निशाना साधा था. ओवैसी ने ट्वीट में लिखा, ”लोगों को असंवैधानिक बातें कहने से रोकने के लिए कोई स्पष्ट कानून नहीं है, लेकिन रामदेव के विचारों पर बेवजह ध्यान क्यों दिया जाता है ?” ओवैसी ने ट्वीट किया था, ”वह योग कर सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि नरेन्द्र मोदी सिर्फ इसलिए अपना मताधिकार खो देंगे, क्योंकि वह तीसरी संतान हैं.

याचिका में कहा गया है, ”अब तक संविधान में 125 बार संशोधन हो चुका है, सैकड़ों नए कानून लागू किए गए, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया गया, जिसकी देश को अत्यंत आवश्यकता है और जिससे भारत की 50 प्रतिशत से अधिक समस्याएं दूर हो सकती हैं.

इसमें अदालत से यह आदेश देने की भी मांग की गई कि केंद्र सरकारी नौकरियों, सहायता एवं सब्सिडी के लिए दो बच्चों का नियम बना सकता है और इसका पालन नहीं करने पर मतदान का अधिकारी, चुनाव लड़ने का अधिकार, सम्पत्ति का अधिकार, नि:शुल्क आश्रय का अधिकार, नि:शुल्क कानूनी सहायता का अधिकार जैसे कानूनी अधिकार वापस लिए जा सकते हैं.

याचिका में दावा किया गया है कि भारत की जनसंख्या चीन से भी अधिक हो गई है, क्योंकि हमारी जनसंख्या के करीब 20 प्रतिशत के पास आधार कार्ड नहीं है और इसलिए सरकारी आंकड़ों में वे शामिल नहीं हैं और देश में करोड़ों रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं.

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि बलात्कार, घरेलू हिंसा जैसे जघन्य अपराधों के पीछे का एक मुख्य कारण होने के अलावा जनसंख्या विस्फोट भ्रष्टाचार का भी मूल कारण है.