बालासोर (ओडिशा): भारत के स्वदेश निर्मित पिनाक मिसाइल प्रणाली का लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को भी सफल उड़ान परीक्षण हुआ. यह मिसाइल 75 किलोमीटर तक लक्ष्य को निशाना बना सकती है, जिससे सेना की युद्धक क्षमता में इजाफा होगा. आर्टिलरी मिसाइल प्रणाली का इसी तरह का परीक्षण गुरुवार को किया गया था.

– पहला परीक्षण 19 दिसंबर को किया गया, जिसमें एक मिसाइल 75 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर दागी गई
– दूसरा सफल परीक्षण आज पूर्वाह्न 11 बजे चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र से किया गया.

डीआरडीओ के बयान में कहा गया, ‘‘आज के परीक्षण का मिशन उद्देश्य कम दूरी पर मारक प्रभाव, आयुध कार्यप्रणाली, प्रक्षेपण वेग को परखने का था.

दोनों मिसाइल 20 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को ध्वस्त करने के लिए दागी गईं और उच्च अचूकता प्राप्त कर ली गई.

– पिनाक डीआरडीओ द्वारा विकसित बहु-रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली है

-यह 44 सेकंड में करीब 12 रॉकेट दाग सकती है.

बयान में कहा गया, ‘‘आज के परीक्षण का मिशन उद्देश्य कम दूरी पर मारक प्रभाव, आयुध कार्यप्रणाली, प्रक्षेपण वेग को परखने का था. दोनों मिसाइल 20 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को ध्वस्त करने के लिए दागी गईं और उच्च अचूकता प्राप्त कर ली गई.

पिनाक डीआरडीओ द्वारा विकसित बहु-रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली है. यह 44 सेकंड में करीब 12 रॉकेट दाग सकती है. डीआरडीओ के अनुसार दागी गईं मिसाइलों पर टेलीमेट्री, रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टीकल टैकिंग सिस्टम से नजर रखी गई, जिसमें परीक्षण की सफलता की पुष्टि हुई है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इसका विकास किया है और यह पिनाक एमके-II रॉकेट का एक उन्नत संस्करण है, जिसमें सटीकता और मारक क्षमता में सुधार के लिए नौवहन, नियंत्रण एवं दिशा निर्देश प्रणाली शामिल की गई है.

रक्षा सूत्रों ने बताया कि मिसाइल प्रणाली उच्च सटीकता के साथ दुश्मन के क्षेत्र में 75 किलोमीटर तक लक्ष्य को भेद सकती है. मिसाइल का परीक्षण यहां पास में चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) से किया गया.

मिसाइल की नौवहन प्रणाली में भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) ने भी सहायता की. सूत्रों ने बताया, मिशन रेंज, सटीकता और संचालन प्रणाली के सभी मानदंड पर कामयाब रहा.

आर्टिलरी मिसाइल प्रणाली का इसी तरह का परीक्षण गुरुवार को किया गया था.

इसकी ट्रैकिंग टेलीमेट्री, रेडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टारगेटिंग प्रणाली (ईओटीएस) से की जाती है. इससे पहले मार्च में पिनाक गाइडेड रॉकेट प्रणाली का तीन बार सफल परीक्षण राजस्थान में पोकरण टेस्ट रेंज से हुआ था.