नई दिल्‍ली: केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी समेत कोई भी अन्‍य थेरेपी स्वीकृत नहीं है. आईसीएमआर ने कोविड-19 के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन शुरू किया है. Also Read - राजधानी दिल्ली में पासवर्ड हैक कर बनाए जा रहे थे फर्जी ई-पास, घेरे में कई कर्मचारी, शुरू हुई जांच

यह बात केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने कही. उन्‍होंने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी प्रायोगिक चरण में है, लेकिन अभी यह दावा करने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल कोविड-19 के इलाज के तौर पर किया जा सकता है. Also Read - देश में लगा करीब एक लाख लोगों की मौत का अंबार, लेकिन टेंशन फ्री होकर गोल्फ खेलते दिखे डोनाल्ड ट्रंप

हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री के अधिकारी ने कहा कि जब तक ICMR अपने अध्ययन का पूरा नहीं करता है और एक मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हो जाता है, तब तक प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग केवल अनुसंधान या परीक्षण के उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए. यदि प्रॉपर गाइडलाइन के तहत प्लाज्मा थेरेपी का उचित तरीके से उपयोग नहीं किया जाता है, तो यह जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकती है. Also Read - खुशखबरी! बिहार में जून के पहले हफ्ते से सड़क पर फिर से दौड़ेंगी बसें, चरणबद्ध रूप में शुरू होगी सेवा

संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि प्‍लाज्‍मा थेरेपी एक प्रमाणित थेरेपी नहीं है. यह अभी प्रयोगिक चरण में है और अभी आईसीएमआर एक प्रयोग कर रही है इस थेरेपी के बारे में अतिरिक्‍त जानकारी जुटाने के लिए. अभी तक जब तक यह प्रमाणित नहीं हो जाती है, तब तक किसी को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए. बता दें कि दिल्‍ली में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों में प्‍लाज्‍मा थेरेपी प्रयोग किया गया था, जिसके कुछ सकारात्‍मक परिणामों को लेकर मीडिया में खबरें आईं थी. इसके बाद अन्‍य राज्‍यों में भी प्‍लाज्‍मा थेरेपी का प्रयोग किए जाने को लेकर खबरें सामने आईं हैं.