नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने के कानून के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है. कोर्ट अब इसकी न्यायिक समीक्षा करेगा. कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है. बता दें कि यूथ फॉर इक्वलिटी नाम की एक एनजीओ ने जनहित याचिका दाखिल की थी.

इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय खन्ना की पीठ करेगी. मोदी सरकार ने आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान में 124वां संशोधन किया था. इसके बाद राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों ने इस विधेयक को 2 दिन में ही पारित कर दिया था. बाद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इसे मंजूरी दे दी थी.

राष्ट्रपति से मंजूर के बाद सबसे पहले गुजरात ने इस आरक्षण व्यवस्था को लागू किया. इसके बाद यूपी और झारखंड ने भी इसे लागू कर लिया. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने सूबे में इस आरक्षण कानून को लागू करने से साफ इनकार कर दिया था. वहीं, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन भी आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है.