नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से देशवासियों को संबोधित किया. पीएम ने कहा कि 10 दिन पहले भारत माता ने अपने वीर सपूतों को खो दिया. पुलवामा के आतंकी हमले में वीर जवानों की शहादत के बाद देशभर के लोगों के मन में आघात और आक्रोश है. वीर सैनिकों की शहादत के बाद, उनके परिजनों की जो प्रेरणादायी बातें सामने आयी हैं उसने पूरे देश के हौसले को और बल दिया है. बिहार के भागलपुर के शहीद रतन ठाकुर के पिता रामनिरंजन जी ने, दुःख की इस घड़ी में भी जिस जज्बे का परिचय दिया है, वह हम सबको प्रेरित करता है.

शहीदों के हर परिवार की कहानी प्रेरणादायक
पीएम ने कहा कि जब तिरंगे में लिपटे शहीद विजय शोरेन का शव झारखण्ड के गुमला पहुंचा तो मासूम बेटे ने यही कहा कि मैं भी फौज में जाऊंगा. इस मासूम का जज्बा आज भारतवर्ष के बच्चे-बच्चे की भावना को व्यक्त करता है. ऐसी ही भावनाएं, हमारे वीर, पराक्रमी शहीदों के घर-घर में देखने को मिल रही हैं. पीएम ने कहा कि हमारा एक भी वीर शहीद इसमें अपवाद नहीं है, उनका परिवार अपवाद नहीं है. चाहे वो देवरिया के शहीद विजय मौर्य का परिवार हो, कांगड़ा के शहीद तिलकराज के माता-पिता हों या फिर कोटा के शहीद हेमराज का छः साल का बेटा हो शहीदों के हर परिवार की कहानी, प्रेरणा से भरी हुई हैं.

शहीदों के परिवार के जज्बे को समझें युवा
पीएम मोदी ने कहा कि मैं युवा-पीढ़ी से अनुरोध करूंगा कि वो, इन परिवारों ने जो जज्बा दिखाया है, जो भावना दिखायी है उसको जानें, समझने का प्रयास करें. देशभक्ति क्या होती है, त्याग-तपस्या क्या होती है उसके लिए हमें इतिहास की पुरानी घटनाओं की ओर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मुझे आश्चर्य भी होता था और पीड़ा भी कि भारत में कोई National War Memorial नहीं था. एक ऐसा मेमोरियल, जहां राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों की शौर्य-गाथाओं को संजो कर रखा जा सके. मैंने निश्चय किया कि देश में, एक ऐसा स्मारक अवश्य होना चाहिए.

बिरसा मुंडा का जिक्र
पीएम ने मन की बात में बिरसा मुंडा का भी जिक्र किया. पीएम ने कहा कि आज, अगर हमारे नौजवानों को मार्गदर्शन के लिए किसी प्रेरणादायी व्यक्तित्व की जरूरत है तो वह है भगवान ‘बिरसा मुंडा. पीएम ने टाटा को भी याद किया और कहा कि जमशेदजी टाटा सही मायने में एक दूरदृष्टा थे, जिन्होंने ना केवल भारत के भविष्य को देखा बल्कि उसकी मजबूत नींव भी रखी. मोदी ने कहा कि हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी भाई देसाई का जन्म 29 फरवरी को हुआ था. सहज, शांतिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी, मोरारजी भाई देश के सबसे अनुशासित नेताओं में से थे. मोरारजी भाई देसाई के कार्यकाल के दौरान ही 44वां संविधान संशोधन लाया गया.

पद्म अवार्ड को लेकर उत्सुकता
यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि emergency के दौरान जो 42वां संशोधन लाया गया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को कम करने और दूसरे ऐसे प्रावधान थे, उनको वापिस किया गया. हर साल की तरह इस बार भी पद्म अवार्ड को लेकर लोगों में बड़ी उत्सुकता थी. आज हम एक न्यू इंडिया की ओर अग्रसर हैं. इसमें हम उन लोगों का सम्मान करना चाहते हैं जो grass-root level पर अपना काम निष्काम भाव से कर रहे हैं. पीएम ने कहा कि अगले दो महीने, हम सभी चुनाव की गहमा-गहमी में व्यस्त होगें. मैं स्वयं भी इस चुनाव में एक प्रत्याशी रहूंगा.

अब चुनाव बाद मन की बात
स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए अगली ‘मन की बात’ मई महीने के आखरी रविवार को होगी. मार्च, अप्रैल और पूरा मई; ये तीन महीने की सारी हमारी जो भावनाएं हैं उन सबको मैं चुनाव के बाद एक नए विश्वास के साथ आपके आशीर्वाद की ताकत के साथ फिर एक बार ‘मन की बात’ के माध्यम से हमारी बातचीत के सिलसिले का आरम्भ करूंगा और सालों तक आपसे ‘मन की बात’ करता रहूंगा.