ढाका: बांग्लादेश के एक शीर्ष अधिकारी ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को भारत का आंतरिक मामला बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को व्यक्तिगत तौर पर आश्वासन दिया है कि एनआरसी सूची में छूटे लोगों को उनके देश वापस नहीं भेजा जाएगा. हसीना के राजनीतिक सलाहकार एचटी इमाम ने कहा, ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर हमारी प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया है कि जिन लोगों के नाम एनआरसी सूची में नहीं हैं उन्हें बांग्लादेश वापस नहीं भेजा जाएगा.’ Also Read - COVID-19 vaccination in India: भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू, लगभग दो लाख कोरोना योद्धाओं को दी गई पहली खुराक; बड़ी बातें

इमाम ने हालांकि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच की बातचीत का ब्योरा नहीं दिया लेकिन कहा, ‘भारत की ओर से हमें बार-बार आश्वस्त किया गया है कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए इस प्रकार का (वापस भेजने का) कोई कदम नहीं उठाया जाएगा. खासतौर पर जब हम (बांग्लादेश) इस वर्ष के अंत में अपने राष्ट्रीय चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं.’ गौरतलब है कि भाजपा के महासचिव राम माधव ने सितंबर में कहा था कि असम एनआरसी की अंतिम सूची में जिन लोगों के नाम नहीं हैं उन्हें उनके देश वापस भेजा जाएगा. Also Read - PM Modi Announced Startup Fund: देश में स्टार्ट-अप को मिलेगा बढ़ावा, PM मोदी ने की 1,000 करोड़ रुपये के फंड की घोषणा

इमाम ने कहा कि ढाका में भारतीय उच्चायुक्त हर्षवर्द्धन ने भी बार बार हमसे यही कहा है कि इससे डरने की जरूरत नहीं है और हमें इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है. हालांकि उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप के 1947 में विभाजन के परिणामस्वरूप दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों ने कूच किया था. इमाम ने कहा, ‘विभाजन के दौरान एक बार जब लोगों का बंटवारा हो गया तो जो लोग दोनों ओर जहां भी बस गए उस देश के नागरिक बन गए. Also Read - Corona Vaccination in India, Day 1: सफल रहा टीकाकरण अभियान का पहला दिन, 1,91,181 लोगों को लगाया गया टीका

गौरतलब है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लगातार अवैध घुसपैठियों का मुद्दा उठा रहे हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि अगर भगवा पार्टी 2019 के लोकसभा चुनावों में सत्ता में बनी रहती है तो वह देश भर में ऐसे घुसपैठियों की पहचान करेंगे. चुनावी राज्य मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की एक रैली में अमित शाह ने कहा था, असम में एनआरसी से 40 लाख घुसपैठिए चिन्हित हो गए हैं. अब इनको मतदाता सूची से भी हटाया जाएगा.पूरे देश से घुसपैठियों को निकालने की शुरुआत असम से की जाएगी.

असम में 30 जुलाई को एनआरसी की सूची जारी की गई थी. इस सूची में 2 करोड़ 89 लाख 83 हजार 677 लोगों को भारत का वैध नागरिक माना गया. कुल 3 करोड़ 29 लाख 91 हजार 384 लोगों ने एनआरसी के लिए आवेदन किया था. इस तरह 40 लाख से ज़्यादा लोग इस सूची से बाहर हो गए हैं. इन लोगों की नागरिकता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. असम में एनआरसी की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरी हो रही है. इसके अनुसार एनआरसी में मार्च 1971 के पहले से असम में रह रहे लोगों का नाम दर्ज किया गया है, जबकि उसके बाद आए लोगों की नागरिकता को संदिग्ध माना गया है.

(इनपुट-भाषा)