अहमदाबाद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साबरमती आश्रम के 100 साल पूरे होने के अवसर पर आज गुजरात में हैं. इस दौरान मोदी ने आश्रम में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अहिंसा के रास्ते पर चलने की बात कही. इस दौरान गाय का जिक्र करते हुए मोदी भावुक भी हो गए. उन्होंने कहा कि गोरक्षा के नाम पर लोगों की जान लेना गलत है. उन्होंने गाय के पश्चाताप की कहानी भी सुनाई.

साबरमती आश्रम के शताब्दी समारोह में गौहत्या की बात करते हुए पीएम मोदी भावुक हो गए. पीएम ने कहा कि मौजूदा हालात को देखकर पीड़ा पहुंचती है. हम अहिंसा की धरती से हैं. हम महात्मा गांधी की धरती से हैं. हम इसे क्यों भूल जाते हैं? मोदी ने अपील की कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा न हो. हमें अंहिसा के रास्ते पर ही चलना होगा. उन्होंने कहा कि गाय की सेवा करना गांधीजी और विनोवा भावे जी ने सिखाया. देश को अहिंसा के रास्ते पर चलना होगा.

सुनाई गाय के त्याग की कहानी

इस दौरान मोदी ने गाय के त्याग की कहानी सुनाई. मोदी ने कहा- जब मैं छोटा था तब हमारे घर के पास एक परिवार रहता था, उस परिवार में कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण उनमें काफी तनाव रहता था. लेकिन काफी उम्र के बाद एक संतान का जन्म हुआ. उस समय एक गाय वहां पर आती थी और रोजाना कुछ खाकर चली जाती थी. मोदी ने कहा कि एक बार वहां मौत हो गई और गाय को कुछ खिला नहीं पाए. तब वो बच्चा एक बार गाय के पैर के नीचे आ गया था और उसकी मौत हो गई.

दूसरे दिन सुबह वो गाय उनके घर के सामने खड़ी हो गई, उसने किसी के घर के सामने रोटी नहीं खाई, उस परिवार से भी रोटी नहीं खाई. गाय की आंखाों से आंसू लगातार बह रहे थे. उस गाय ने कई दिनों तक कुछ नहीं खाया. मोहल्ले के लोगों ने काफी कोशिशें कीं, पर गाय ने कुछ नहीं खाया. बाद में उस गाय ने अपना शरीर त्याग दिया. एक बालक की मृत्यु के पश्चाताप में उस गाय ने ऐसा किया. लेकिन आज गाय के नाम पर हत्या की जा रही है.

मोदी ने आगे कहा कि गौभक्ति के नाम पर लोगों को मारना स्वीकार नहीं किया जा सकता है. ये वो नहीं जिसकी अनुमति महात्मा गांधी ने दी थी. कानून हाथ में न लें, कानून अपना काम करेगा. मोदी ने दुनिया भर के लोगों से अपील की कि वह साबरमती आश्रम देखने आएं.