नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आपातकाल को याद करते हुए कहा कि लोकतंत्र हमारी संस्कृति और विरासत का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि आपातकाल के 19 महीने के दौरान लोगों को लगा कि उनसे कुछ छीन लिया गया है. मोदी ने दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद अपने पहले ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम में लोकतांत्रिक भावना के बारे में बात करते हुए कहा कि आपातकाल का सिर्फ राजनीतिक दलों और उसके नेताओं ने ही नहीं बल्कि आम जनता ने भी विरोध किया था.

उन्होंने कहा, “जब आपातकाल लागू किया गया था, तो इसका सिर्फ राजनीतिक दलों द्वारा विरोध नहीं किया गया था या यह महज जेल की सलाखों तक सीमित नहीं था. आम आदमी के दिल में गुस्सा था. लोकतंत्र के छिन जाने की लोगों में बेचैनी थी. हमें लोकतांत्रिक अधिकारों के महत्व का एहसास उस समय हुआ जब इसे हमसे छीन लिया गया.”

मोदी ने कहा, “भारत गर्व से कह सकता है कि नियम और कानून से परे लोकतंत्र हमारी विरासत और संस्कृति है. आम आदमी ने आपातकाल की पीड़ा को महसूस किया था.” हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश की चुनावी प्रक्रिया का पैमाना हर भारतीय को गौरवान्वित करता है. उन्होंने कहा, “भारत ने बस अभी सबसे बड़ा चुनाव पूरा किया है. चुनाव का पैमाना बहुत बड़ा था. यह हमारे लोकतंत्र में लोगों के विश्वास के बारे में बताता है.”

आपातकाल के अलावा, प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया क्योंकि देश के बड़े हिस्सों में सूखे की मार है. लोकसभा चुनाव के कारण चार महीने के विराम के बाद मोदी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के साथ लौटे. यह आखिरी बार फरवरी में प्रसारित किया गया था.

प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों से जल संरक्षण के लिए जन आंदोलन की शुरुआत करने की अपील की. उन्होंने कहा, ‘‘पानी के संरक्षण के लिए देश में विभिन्न पारंपरिक तौर-तरीकों को सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं और मैं आप सभी से उन तरीकों को साझा करने का आग्रह करता हूं.”