पेंडिंग काम तुरंत खत्म कीजिए... PM मोदी का मंत्रियों को मैसेज, जानें किन-किन चीजों के रिफॉर्म पर दिया जोर
PM मोदी ने मंत्रीपरिषद से कहा, हमारी सरकार 2014 से सत्ता में है, लेकिन अब 2026 है. इसलिए हमें यह देखना होगा कि भविष्य में हम क्या कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा पूरी कर भारत लौट चुके हैं. गुरुवार (21 मई) को उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता की. इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार के सभी विभागों के काम की समीक्षा की. साढ़े चार घंटे तक चली इस बैठक के दौरान PM मोदी ने सभी मंत्रालयों में रिफॉर्म पर जोर देते हुए हर चीज में सरलता लाने की बात कही. साथ ही उन्होंने बैठक में शामिल सभी मंत्रियों और अधिकारियों को कम समय में ज्यादा काम करने के लिए भी प्रेरित किया.
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में सभी विभागों से जनहित को सर्वोपरि रखकर काम करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि काम ऐसे किया जाए, जिससे कम समय में ज्यादा काम हो, हर चीज में सरलता आए. फाइल फालतू में चक्कर न काटे और जल्दी से चले. मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि देश की जनता के प्रति हमारा कमिटमेंट है.
PM मोदी ने किन-किन कामों पर दिया जोर
PM मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक में समीक्षा के दौरान जिन मंत्रालयों की परफॉर्मेंस रैंकिंग के हिसाब से कमजोर थी, उन्हें काम में सुधार लाने को कहा. मोदी ने कहा, "बीते कल से तुलना नहीं करनी है, आगे कैसे अपना परफॉर्मेंस बढ़ाना है, उस पर फोकस करना है." पीएम मोदी ने कहा, "हमारी सरकार 2014 से सत्ता में है, लेकिन अब 2026 है, इसलिए हमें यह देखना होगा कि भविष्य में हम क्या कर सकते हैं. अनावश्यक विवादों में न उलझें और अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें."
PM ने देखा 9 विभागों का प्रेजेंटेशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की बैठक में केंद्र सरकार के कृषि, वन, श्रम, सड़क परिवहन, कॉरपोरेट, विदेश, कॉमर्स, पावर समेत 9 विभागों का प्रेजेंटेशन दिया. बैठक में केंद्र के सभी विभाग के मंत्रियों के साथ सचिव भी मौजूद रहे.
PM मोदी पहले भी लोगों से अपील कर चुके हैं कि वे ईंधन का समझदारी से इस्तेमाल करें, सोने की खरीद सीमित करें और विदेश यात्रा पर खर्च को लेकर सतर्क रहें. सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में आर्थिक अनुशासन बेहद जरूरी है.
ये मीटिंग ऐसे वक्त में हुई है, जब मिडिल ईस्ट में तनाव और अनिश्चता बढ़ती जा रही है. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. इसका सीधा असर भारत पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि देश अपनी करीब 85% तेल जरूरत आयात से पूरी करता है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा भी बताया जा रहा है.
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